सीजी भास्कर, 20 जून : छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और उपभोक्ता हितैषी बनाने की दिशा में स्मार्ट मीटर (Smart Meter) लगाने का कार्य तेजी से जारी है। यह किसी राज्य सरकार की अलग योजना नहीं बल्कि केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत देशभर में लागू एक राष्ट्रीय पहल है, जिसके अंतर्गत निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों के अनुसार स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।
ऊर्जा विभाग के अनुसार इस योजना का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ाना, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों को कम करना, बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता सुधारना और उपभोक्ताओं को सटीक बिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराना है।
2022 में लिया गया था कार्यान्वयन का निर्णय
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर परियोजना को लागू करने का निर्णय वर्ष 2022 में पूर्ववर्ती सरकार द्वारा लिया गया था। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और कार्यादेश जारी किए जाने के बाद फरवरी 2024 से राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य शुरू हुआ। वर्तमान में यह परियोजना उन्हीं अनुबंधों और निविदाओं के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
प्रदेश में लगभग 55 लाख उपभोक्ताओं तक स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से करीब 40 लाख मीटर अब तक स्थापित किए जा चुके हैं।
उपभोक्ताओं को मिल रही वास्तविक समय में खपत की जानकारी
स्मार्ट मीटर के माध्यम से उपभोक्ताओं को कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मिल रही हैं। बिजली की खपत का डेटा हर 30 मिनट में उपलब्ध हो रहा है, जिससे उपभोक्ता अपने उपयोग पर लगातार नजर रख सकते हैं। इससे गलत मीटर रीडिंग की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है और बिलिंग अधिक सटीक हो रही है।
इसके अलावा स्मार्ट मीटर से बिजली भार, वोल्टेज और ऊर्जा खपत जैसी तकनीकी जानकारी भी वास्तविक समय में उपलब्ध हो रही है, जिससे उपभोक्ता और विभाग दोनों को सिस्टम पर बेहतर नियंत्रण मिल रहा है।
वितरण व्यवस्था होगी और अधिक मजबूत
ऊर्जा विभाग के अनुसार स्मार्ट मीटरिंग से विद्युत वितरण कंपनियों को नेटवर्क की स्थिति का लगातार विश्लेषण करने में मदद मिल रही है। इससे ओवरलोडिंग, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो रही है।
इसका सीधा लाभ उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति के रूप में मिल रहा है।
बोझ नहीं, पारदर्शी व्यवस्था का सुधार : ऊर्जा विभाग
ऊर्जा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालना नहीं है, बल्कि पूरी बिजली वितरण प्रणाली को पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाना है। यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार की योजना और उसके दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है, जिससे भविष्य में बिजली व्यवस्था और अधिक दक्ष हो सके।





