सीजी भास्कर, 08 सितम्बर। भारत आगामी 18वें BRICS सम्मेलन में आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए नया फ्रेमवर्क प्रस्तावित करने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी का तेजी से आदान-प्रदान करना और विदेशों में छिपे आर्थिक अपराधियों को जल्द भारत वापस लाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। (Economic Offenders Framework)
जानकारी साझा करने में आएगी तेजी : Economic Offenders Framework
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सदस्य देशों की जांच एजेंसियों के बीच शुरुआती जांच के स्तर पर ही एक तय प्रारूप में जानकारी साझा करने की व्यवस्था की जाएगी। इसमें संदिग्धों की संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाओं के आदान-प्रदान के साथ संपत्ति की रिकवरी के लिए भी नियम तय किए जाने की बात है।
भारत का मानना है कि आर्थिक अपराधों की जांच में अलग-अलग देशों के कानून और प्रक्रियाएं बड़ी चुनौती बनती हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से प्रत्यर्पण और संपत्ति की बरामदगी से जुड़ी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय कम किया जा सकता है।

नीरव मोदी जैसे मामलों में मदद की उम्मीद
भारत लंबे समय से विदेशों में रह रहे आर्थिक अपराध के आरोपियों को वापस लाने की कोशिश कर रहा है। नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे मामलों में अलग-अलग देशों की कानूनी प्रक्रियाओं के कारण प्रत्यर्पण में लंबा समय लगा है।
प्रस्तावित फ्रेमवर्क के जरिए जांच एजेंसियों को शुरुआती चरण में ही एक-दूसरे के साथ समन्वय करने का अवसर मिलेगा। इससे भ्रष्टाचार और बड़े वित्तीय घोटालों से जुड़े मामलों में वांछित आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होने की उम्मीद है।
क्रिप्टो और डिजिटल संपत्तियों पर भी नजर : Economic Offenders Framework
आर्थिक अपराधों में अब फिनटेक प्लेटफॉर्म और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। क्रिप्टो जैसी डिजिटल संपत्तियों को ट्रैक करना और उन्हें फ्रीज करना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है।
नए फ्रेमवर्क में डिजिटल संपत्तियों से जुड़े वित्तीय अपराधों की पहचान और उन पर कार्रवाई के लिए तकनीकी सहयोग को भी शामिल किए जाने की तैयारी है। भारत पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिप्टो परिसंपत्तियों के नियमन और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर देता रहा है।
BRICS सम्मेलन से पहले क्षमता बढ़ाने पर जोर
BRICS सम्मेलन से पहले गांधीनगर में आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। इसमें BRICS देशों के नीति निर्माता, वित्तीय खुफिया इकाइयों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से जुड़े विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य संबंधित एजेंसियों की क्षमता बढ़ाना और आर्थिक अपराधों की जांच, वित्तीय जानकारी के आदान-प्रदान तथा अवैध संपत्तियों की पहचान जैसे क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करना है।
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS सम्मेलन की मेजबानी करेगा। इसी दौरान आर्थिक अपराधियों के खिलाफ प्रस्तावित नए तंत्र को औपचारिक रूप से सदस्य देशों के सामने रखा जा सकता है।




