सीजी भास्कर, 11 सितंबर : दुर्ग में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। दुष्कर्म-हत्या मामले में मृत्युदंड (Durg POCSO Death Penalty) सुनाते हुए अदालत ने 24 वर्षीय सोमेश यादव को दोषी ठहराया है। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए इसे ‘विरलतम से विरलतम’ श्रेणी का मामला माना है। हालांकि, मृत्युदंड की अंतिम पुष्टि अभी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर को करनी होगी।
विशेष दाण्डिक प्रकरण पॉक्सो में अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ एफटीएससी विशेष न्यायालय पॉक्सो दुर्ग ने 10 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया। आरोपी सोमेश यादव ओम नगर उरला, थाना मोहन नगर क्षेत्र का निवासी है। अदालत ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मृत्युदंड के साथ दोनों धाराओं में 5-5 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है।
17 महीने पुराने मामले में फैसला
दुर्ग पॉक्सो मामले में फैसला (Durg POCSO Death Penalty) अप्रैल 2025 की उस घटना पर आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। पुलिस के अनुसार, छह साल तीन माह की बच्ची नवरात्रि के दौरान कन्या भोज में शामिल होने के लिए घर से निकली थी, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटी। परिजनों ने बच्ची के लापता होने की सूचना मोहन नगर थाने में दी, जिसके बाद पुलिस ने तलाश शुरू की।
तलाश के दौरान बच्ची का शव उसके घर के पास ट्रांसफार्मर के समीप खड़ी एक कार में मिला था। प्रारंभिक जांच में शरीर पर चोट के निशान पाए गए थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामले की जांच तेज की और अलग-अलग स्तर पर साक्ष्य जुटाने शुरू किए।
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जांच में चाचा का नाम आया
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने बच्ची के चाचा सोमेश यादव को आरोपी बनाया। चाचा को मृत्युदंड (Durg POCSO Death Penalty) मिलने के पीछे अभियोजन द्वारा पेश किए गए कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों की भूमिका रही। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके मेमोरेण्डम के आधार पर संबंधित वस्तुओं की बरामदगी की।
पुलिस ने मामले में पारंपरिक साक्ष्यों के साथ वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भी विशेष जोर दिया। जांच के दौरान डीएनए, जैविक, चिकित्सकीय, सीसीटीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए गए। अभियोजन ने इन साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराया।
डीएनए रिपोर्ट बनी अहम कड़ी
डीएनए साक्ष्य से खुला राज (Durg POCSO Death Penalty) इस मामले की जांच में अहम कड़ी माना गया। अप्रैल 2025 में पुलिस ने तीन संदिग्धों के डीएनए नमूने जांच के लिए भेजे थे। जांच रिपोर्ट में सोमेश यादव के डीएनए के मैच होने की जानकारी सामने आई थी।
इसके बाद वैज्ञानिक जांच से मिले अन्य साक्ष्यों और अभियोजन की ओर से अदालत में रखे गए दस्तावेजों को मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया गया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना और गंभीर अपराध के लिए मृत्युदंड की सजा सुनाई।
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परिवार को 7 लाख की क्षतिपूर्ति
पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति (Durg POCSO Death Penalty) देने का भी अदालत ने आदेश दिया है। आहत प्रतिकर योजना के तहत पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(क) के तहत आरोपी को पांच वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है।
अदालत ने सभी सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया है। मामले में मृत्युदंड सुनाए जाने के बावजूद इसे तत्काल लागू नहीं किया जा सकता। मृत्युदंड की पुष्टि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर द्वारा की जानी है और इसके बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
हाई कोर्ट करेगा फांसी की पुष्टि
मृत्युदंड की हाईकोर्ट पुष्टि (Durg POCSO Death Penalty) के बाद ही इस सजा पर अंतिम कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। विशेष पॉक्सो अदालत का फैसला अप्रैल 2025 की घटना के करीब 17 महीने बाद आया है। मामले में पुलिस की ओर से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और उन्हें अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने को अभियोजन के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
छह साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर अपराध में अदालत द्वारा मामले को ‘विरलतम से विरलतम’ मानना फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। अब मृत्युदंड की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट के समक्ष जाएगा, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
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