सीजी भास्कर, 19 सितंबर : झीरम घाटी हमले (Jhiram Case) के मामले में एनआईए की विशेष अदालत के हालिया फैसले के बाद आदिवासी समाज और कांग्रेस ने आगे की कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। सर्व आदिवासी समाज ने दोषी ठहराए गए 10 ग्रामीणों को निर्दोष बताते हुए फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। जरूरत पड़ने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात भी कही गई है। वहीं कांग्रेस भी मामले में आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर मंथन कर रही है।
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छह जिलों के प्रतिनिधियों ने बनाई कानूनी रणनीति
परपा स्थित कोया समाज भवन में बस्तर संभाग के छह जिलों के प्रतिनिधियों और सजा पाए ग्रामीणों के परिजनों की करीब तीन घंटे तक बैठक हुई। बैठक में दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव और बस्तर समेत अन्य क्षेत्रों से प्रतिनिधि शामिल हुए।
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बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि एनआईए अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर कानूनी लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की रणनीति भी बनाई गई।
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हर आदिवासी परिवार से 20 रुपए जुटाएगा समाज
कानूनी प्रक्रिया में होने वाले खर्च के लिए बस्तर संभाग के आदिवासी परिवारों से स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग जुटाने का फैसला किया गया है। इसके तहत प्रत्येक परिवार से 20-20 रुपए का सहयोग लेने की योजना है।
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सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि समाज न्यायिक व्यवस्था का सम्मान करता है। हालांकि, दोषी ठहराए गए 10 ग्रामीणों के परिजनों का कहना है कि वे निर्दोष हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है।
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झीरम की कथित साजिश की दोबारा जांच की मांग
समाज का कहना है कि झीरम कांड (Jhiram Case) के पीछे की कथित वास्तविक साजिश और मुख्य साजिशकर्ताओं की भूमिका की व्यापक एवं निष्पक्ष जांच अभी बाकी है। बैठक में घटना से जुड़े सभी पहलुओं और संदिग्धों की भूमिका की दोबारा जांच कराने की मांग उठाई गई।
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इसके अलावा आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को दिए जा रहे लाभ और उनसे जुड़े बयानों के पुनर्मूल्यांकन की मांग भी की गई। जेलों में बंद बताए जा रहे निर्दोष आदिवासियों की पैरवी के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय भी बैठक में लिया गया।
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कांग्रेस में भी आगे की रणनीति पर मंथन
इधर रायपुर के राजीव भवन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई। इसमें नेता प्रतिपक्ष डा. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू और प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैंदु समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हो रहे हैं।
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बैठक में झीरम कांड में जान गंवाने वाले शहीदों के परिजन, घटना में घायल हुए लोग और वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की मौजूदगी भी है। कांग्रेस विशेष अदालत के फैसले के बाद पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आगे उठाए जाने वाले कानूनी और रणनीतिक कदमों पर विचार कर रही है।
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फिलहाल आदिवासी समाज ने हाईकोर्ट जाने का फैसला किया है, जबकि कांग्रेस भी मामले में आगे की रणनीति तैयार कर रही है। ऐसे में एनआईए कोर्ट के फैसले (Jhiram Case) के बाद झीरम घाटी मामले को लेकर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है।
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