सीजी भास्कर, 23 सितंबर : शराब से होने वाले सामाजिक और आर्थिक नुकसान को देखते हुए आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत केवरी ने सामूहिक पहल की है। ग्रामसभा में शराबबंदी का प्रस्ताव (Kevra Liquor Ban) पारित कर पंचायत ने अनुसूचित क्षेत्रों में मिलने वाली घरेलू महुआ शराब बनाने की छूट का उपयोग नहीं करने का निर्णय लिया है। एक सितंबर से गांव में शराब निर्माण, बिक्री और सेवन पर अर्थदंड का प्रावधान लागू किया गया है। अब तक 16 लोगों से कुल 45 हजार रुपये का अर्थदंड वसूला जा चुका है।
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ग्रामसभा में सभी की सहमति से लिया फैसला
सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत केवरी में 20 अगस्त को ग्रामसभा आयोजित कर शराबबंदी का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद गांव में घर-घर जाकर लोगों को नए नियम की जानकारी दी गई और पंपलेट बांटकर जागरूक किया गया। एक सितंबर से नियम लागू होने के बाद निगरानी समितियों ने शराब निर्माण और सेवन (Kevra Liquor Ban) पर नजर रखना शुरू किया। पंचायत के हर मोहल्ले में समिति गठित की गई है, जो नियमों के उल्लंघन की जानकारी पंचायत तक पहुंचाती है।
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16 लोगों से वसूला गया 45 हजार रुपये अर्थदंड
शराबबंदी लागू होने के बाद अब तक 16 लोगों पर अर्थदंड लगाया गया है। इनमें 14 लोग दूसरे गांव से शराब का सेवन कर केवरी पहुंचे थे। इन सभी पर तीन-तीन हजार रुपये के हिसाब से अर्थदंड लगाया गया। वहीं, दो लोग शराब का सेवन कर गांव में घूमते मिले। दोनों से 1500-1500 रुपये अर्थदंड वसूला गया। इस तरह शराबबंदी (Kevra Liquor Ban) के तहत अब तक कुल 45 हजार रुपये की राशि वसूली गई है।
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शराब बनाने और बेचने पर 5 हजार का जुर्माना
ग्राम पंचायत ने शराब निर्माण और बिक्री पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड तय किया है। शराब का सेवन करने पर 1500 रुपये और शराब के नशे में लड़ाई-झगड़ा करने या दूसरे गांव से शराब पीकर आने पर तीन हजार रुपये अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। पंचायत के मुताबिक शराब के कारण गांव में आए दिन विवाद होते थे। कई परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही थी। महिलाओं को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा था। इन समस्याओं को देखते हुए ग्रामीणों ने पूर्ण शराबबंदी (Kevra Liquor Ban) का फैसला लिया।
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2500 की आबादी, आदिवासी बहुल गांव
ग्राम पंचायत केवरी की आबादी करीब 2500 है, जबकि यहां लगभग 1100 मतदाता हैं। गांव में गोंड और कंवर जनजाति के साथ मानिकपुरी, यादव और लोहार समाज के लोग भी निवास करते हैं। शराबबंदी से पहले कई घरों में देशी महुआ शराब बनाई जाती थी। पंचायत के अनुसार अब ऐसे परिवारों ने भी शराब निर्माण और बिक्री का काम बंद कर दिया है। निगरानी समितियां लगातार गांव की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।
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अर्थदंड की राशि गांव के विकास में होगी खर्च
सरपंच मनिजर राम ने बताया कि शराबबंदी का निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया है। ग्रामसभा में सभी की सहमति से अर्थदंड का प्रावधान लागू किया गया है। उनके अनुसार अर्थदंड से मिलने वाली राशि का उपयोग गांव के विकास कार्यों में किया जाएगा। प्रत्येक मोहल्ले में बनी निगरानी समिति शराबबंदी के निर्णय का पालन सुनिश्चित करने के लिए गतिविधियों पर नजर रखेगी।
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आबकारी विभाग ने बताया स्वप्रेरित फैसला
सहायक जिला आबकारी अधिकारी सरगुजा रंजीत गुप्ता ने पंचायत के निर्णय को स्वप्रेरित पहल बताया। उन्होंने कहा कि पांच लीटर महुआ शराब बनाने और रखने की छूट का कुछ परिवार व्यावसायिक उपयोग करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि इस छूट का उपयोग छोड़कर शिक्षा और अन्य विकास के अवसरों से जुड़ने का प्रयास किया जाए तो जीवन स्तर में सुधार हो सकता है। उन्होंने शराब निर्माण की छूट के बजाय शासन की अन्य योजनाओं और लाभों का उपयोग करने पर जोर दिया। ग्रामसभा के निर्णय के बाद गांव में शराबबंदी (Kevra Liquor Ban) लागू है और पंचायत स्तर पर इसके पालन की निगरानी की जा रही है।
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