सीजी भास्कर, 01 अक्टूबर। भिलाई नगर में 73 वर्षीय अंजता देवी और 76 वर्षीय रामाकांत सिंह ने अपने चार बेटों पर देखरेख, भोजन और दवा इलाज नहीं कराने का आरोप (Senior Citizen) लगाया है। बुजुर्ग दंपति ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत कर मदद की गुहार लगाई थी।
शिकायत पर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ नागरिक कल्याण प्रभाग ने संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने दुर्ग के अनुविभागीय अधिकारी को माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत तत्काल ट्रिब्यूनल में सुनवाई कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

आठ साल से बेटों पर देखरेख नहीं करने का आरोप Senior Citizen
अंजता देवी के आवेदन के अनुसार उनके परिवार में पांच बेटे और एक बेटी थी। एक बेटे की मौत के बाद उन्होंने उसके 25 वर्षीय बेटे विक्रांत सिंह को गोद लेकर बड़ा किया। उनका आरोप है कि पिछले आठ वर्षों से चारों जीवित बेटे उनकी देखरेख और इलाज से दूरी बनाए हुए हैं।
सबसे छोटा बेटा पुलिस में कार्यरत है। बुजुर्ग दंपति का आरोप है कि आर्थिक और शारीरिक मदद नहीं मिलने के कारण उन्हें कई बार बेडरूम में चूल्हा रखकर खाना बनाना पड़ा।
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शिकायत में आरोप है कि पिता की सेवानिवृत्ति लाभ की राशि और गंभीर हृदय रोग के दौरान पेसमेकर प्रत्यारोपण के लिए मिली सहायता की रकम भी बेटों ने अपने पास रख ली। मार्च 2023 में रिश्तेदारों की मौजूदगी में हुए समझौते में बेटों ने हर महीने साढ़े तीन हजार रुपए देने की बात कही थी, लेकिन चार महीने बाद यह सहायता भी बंद कर दी गई।
इसके बाद दंपति को जीवनयापन और आंखों के ऑपरेशन के लिए अपनी बची पैतृक संपत्ति बेचनी पड़ी।
पोता कर रहा बुजुर्ग दंपति की मदद
बुजुर्ग दंपति के अनुसार उनका पोता विक्रांत सिंह छोटी फोटो कॉपी की दुकान चलाता है। वह उनके इलाज, घर के किराए और दैनिक जरूरतों में मदद कर रहा है। इसके लिए उस पर कर्ज भी हो गया है।
दंपति ने अपनी शिकायत में यह भी मांग की है कि मृत्यु के बाद उनकी अंतिम यात्रा और विधि-विधान में उन बेटों को शामिल नहीं किया जाए, जिन्होंने उनकी देखभाल नहीं की। उनका कहना है कि जीवन के अंतिम पड़ाव में वे सम्मान के साथ जीवन जीना चाहते हैं।
कानून में भरण-पोषण का प्रावधान
माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 के तहत संतान पर माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी तय की गई है। ऐसे मामलों में मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल संतान की आय और परिस्थितियों के आधार पर भरण-पोषण राशि तय कर सकता है।
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