सीजी भास्कर, 2 अक्टूबर : बंदियों को इलाज, पेशी या प्रशासनिक काम से जेल से बाहर ले जाने की व्यवस्था अब और सख्त होगी। सुरक्षा ड्यूटी में तैनात जेलकर्मियों (Prisoners VIP Treatment) को बॉडी वार्न कैमरा पहनना होगा। इससे बंदी को जेल से बाहर ले जाने से लेकर वापस पहुंचाने तक की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग की जा सकेगी।
जेल मुख्यालय ने सुरक्षा व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव किया है। बाहर जाने वाले बंदियों के साथ सुरक्षा कर्मियों के अलावा उपलब्धता के आधार पर सहायक जेल अधीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी जरूरी होगी। इसका उद्देश्य बंदियों की निगरानी और सुरक्षा ड्यूटी में जवाबदेही को मजबूत करना है।
यह व्यवस्था रायपुर में सीजीपीएससी भर्ती परीक्षा-2021 घोटाले के मुख्य आरोपित टामन सिंह सोनवानी को इलाज के लिए आंबेडकर अस्पताल ले जाने के दौरान सामने आए कथित वीआईपी सुविधा के मामले के बाद लागू किए गए नए निर्देशों का हिस्सा है। रिपोर्टों के मुताबिक, मामले में तीन जेल प्रहरियों पर कार्रवाई की गई, जिसमें एक को सेवा से बर्खास्त किया गया और दो के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई।
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डीजी जेल का आदेश
डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने 1 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि विचाराधीन, दंडित या अन्य बंदियों को चिकित्सा, न्यायालयीन, प्रशासनिक अथवा अन्य कारणों से जेल से बाहर ले जाते समय सुरक्षा स्टाफ के साथ उपलब्धता के अनुसार सहायक जेल अधीक्षक या वरिष्ठ रैंक के अधिकारी को भी भेजा जाए। नए नियम बंदियों की निगरानी (Prisoners VIP Treatment) को मजबूत करने के साथ सुरक्षा ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय करते हैं।
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कैमरे में रिकॉर्ड होगी गतिविधि
निर्देश के अनुसार सुरक्षा ड्यूटी में तैनात जेलकर्मियों को बॉडी वार्न कैमरा पहनना होगा। इससे बंदी को जेल से बाहर ले जाने, अस्पताल या अदालत में रहने और वापस जेल पहुंचाने के दौरान की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सकेगा। इससे सुरक्षा निगरानी (Prisoners VIP Treatment) के दौरान होने वाली गतिविधियों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। साथ ही किसी घटना या शिकायत की स्थिति में रिकॉर्डिंग की जांच की जा सकेगी।
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पुलिस से भी होगा समन्वय
जेल से किसी बंदी को बाहर ले जाने की स्थिति में संबंधित जेल अधीक्षक को जिले के पुलिस अधीक्षक से समन्वय करना होगा। बंदी की सुरक्षा के लिए आवश्यक पुलिस व्यवस्था को लेकर दोनों विभाग आपसी चर्चा के बाद निर्णय लेंगे। इस व्यवस्था में बंदियों की सुरक्षा (Prisoners VIP Treatment) के लिए जेल और पुलिस प्रशासन के बीच समन्वय को भी महत्वपूर्ण माना गया है।
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वीआईपी सुविधा के बाद सख्ती
नए निर्देश ऐसे समय में आए हैं, जब टामन सिंह सोनवानी को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के दौरान कथित वीआईपी सुविधा का वीडियो सामने आया था। वीडियो में उन्हें बिना हथकड़ी परिजनों के साथ बातचीत करते देखा गया था। इसके बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा ड्यूटी में तैनात प्रहरियों पर कार्रवाई की। मामले के बाद जेल सुरक्षा व्यवस्था (Prisoners VIP Treatment) को लेकर मुख्यालय ने सभी जेल अधीक्षकों को नए निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है।
सभी जेलों में लागू निर्देश
जेल मुख्यालय एवं सुधारात्मक सेवाएं की ओर से प्रदेश के सभी जेल अधीक्षकों को आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश की प्रति छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई है। अब जेल से बाहर जाने वाले बंदियों की सुरक्षा, वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी और बॉडी वार्न कैमरे से निगरानी पर विशेष जोर रहेगा। इससे जेल से बाहर बंदियों की निगरानी (Prisoners VIP Treatment) की पूरी प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने की कोशिश की गई है।
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