सीजी भास्कर, 2 अक्टूबर : जहां कभी डर और खौफ के कारण ग्रामीण खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते थे, वहां अब लोग एक साथ बैठकर गांव की जरूरतों और विकास पर चर्चा कर रहे हैं। गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष ग्राम सभा (Gram Sabha) में ग्रामीणों ने अपने गांव के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर खुलकर भागीदारी की।
इस ग्राम सभा (Gram Sabha) में ग्रामीणों ने पानी, रोजगार, आजीविका और गांव की बुनियादी जरूरतों जैसे विषयों पर चर्चा की। पेड़ की छांव में जुटे ग्रामीणों की भागीदारी ने यह दिखाया कि स्थानीय स्तर पर विकास की प्राथमिकताएं तय करने में गांव के लोगों की भूमिका बढ़ रही है।
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कच्चापाल में बदली तस्वीर
यह तस्वीर नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड की ग्राम पंचायत कच्चापाल से सामने आई। कभी नक्सल प्रभाव से जूझ चुके इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण पेड़ की छांव में जुटे और ग्राम सभा (Gram Sabha) के माध्यम से गांव की जरूरतों और विकास कार्यों पर चर्चा की। कच्चापाल की ग्राम सभा (Gram Sabha) इसलिए भी खास रही, क्योंकि जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की तथाकथित जन अदालतों का भय बताया जाता था, वहां अब ग्रामीण संवैधानिक ग्राम सभा के मंच पर अपनी बात रख रहे हैं।
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पेड़ की छांव में बैठक
ग्राम सभा के लिए किसी बड़े सभागार की व्यवस्था नहीं थी। ग्रामीण पेड़ के नीचे एकत्र हुए और सामूहिक रूप से गांव की आवश्यकताओं पर चर्चा की। महिलाओं समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बैठक में हिस्सा लिया और स्थानीय जरूरतों से जुड़े विषय सामने रखे। इस दौरान गांव के विकास कार्यों के साथ उपलब्ध संसाधनों और जरूरी सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। ग्रामीणों से मिले सुझावों को आगे की विकास योजना तैयार करने में शामिल किया जाएगा।
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विकास का रोडमैप
प्रदेश की अन्य ग्राम पंचायतों में भी विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को अपने गांव की विकास प्राथमिकताएं तय करने की प्रक्रिया से जोड़ना रहा। ग्राम सभा (Gram Sabha) के दौरान जल संरक्षण, आजीविका संवर्धन और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्यों की पहचान पर जोर दिया गया। ग्रामीणों से स्थानीय जरूरतों के अनुसार सुझाव लिए गए, ताकि विकसित ग्राम पंचायत प्लान तैयार किया जा सके।
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रोजगार योजनाओं की जानकारी
विशेष ग्राम सभाओं में ग्रामीणों को रोजगार और मजदूरी से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। रिफॉर्म उत्सव के तहत 125 दिवस रोजगार की वैधानिक गारंटी, समय पर रोजगार और मजदूरी भुगतान समेत योजना के तहत अनुमेय कार्यों की जानकारी साझा की गई। ग्रामीणों को बताया गया कि स्थानीय संसाधनों और जरूरतों का आकलन कर विकास योजना तैयार की जाएगी। इससे गांव में जरूरी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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बदलते बस्तर की तस्वीर
कच्चापाल की ग्राम सभा (Gram Sabha) केवल एक बैठक नहीं रही। बड़ी संख्या में ग्रामीणों का एक साथ बैठकर अपने गांव की जरूरतों पर चर्चा करना लोकतांत्रिक भागीदारी की तस्वीर पेश करता है। जहां कभी नक्सल प्रभाव और तथाकथित जन अदालतों के भय का जिक्र होता था, वहीं अब ग्रामीण संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रख रहे हैं। स्थानीय जरूरतों पर चर्चा से लेकर विकास की प्राथमिकताएं तय करने तक, गांव की ग्राम सभा (Gram Sabha) में ग्रामीणों की भागीदारी इस बदलाव को सामने लाती है।
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