दो श्रेणियों में फिल्मों को मिला पहला स्थान
सीजी भास्कर, 08 अक्टूबर । साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से कुल 162 प्रविष्टियां मिलीं। प्रतियोगिता में रूस से भी एक फिल्म शामिल हुई। ‘संकल्प- साइबर क्राइम मुक्त छत्तीसगढ़’ थीम पर आयोजित प्रतियोगिता की दो श्रेणियों में ‘दूसर छोर’ और ‘एक्सेस लिंक’ ने पहला स्थान हासिल किया। (Cyber Crime Free Chhattisgarh)
3 से 6 मिनट की फिल्मों वाली श्रेणी में स्वपनिल कोटरीवार की ‘दूसर छोर’ प्रथम, होमेन्द्र कुमार की ‘जरूरत’ द्वितीय और प्रकाश पटेल की ‘गुपचुप ठेला’ तृतीय रही। वहीं 1 से 3 मिनट की फिल्मों की श्रेणी में दीपक जायसवाल की ‘एक्सेस लिंक’ प्रथम, तुषार सोलंकी की ‘Dial 1930’ द्वितीय और समीर चन्द्रा की ‘Golden Hour’ तृतीय रही।

विजेताओं को 5.25 लाख रुपए की पुरस्कार राशि : Cyber Crime Free Chhattisgarh
पहली श्रेणी में प्रथम विजेता को 1 लाख, द्वितीय को 75 हजार और तृतीय को 50 हजार रुपए दिए गए। दूसरी श्रेणी में प्रथम विजेता को 75 हजार, द्वितीय को 50 हजार और तृतीय को 25 हजार रुपए की पुरस्कार राशि मिली। दोनों श्रेणियों के विजेताओं को कुल 5.25 लाख रुपए प्रदान किए गए।
समापन और सम्मान समारोह के दौरान साइबर अपराधों से बचाव के लिए तैयार की गई जागरूकता फिल्म ‘द साइबर ट्रैप’ की स्क्रीनिंग भी की गई। यह फिल्म प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं थी, बल्कि आम लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से तैयार की गई थी।
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सात सप्ताह में करीब 2 लाख लोगों तक पहुंचा साइबर जागरूकता अभियान
15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक प्रदेशभर में चलाए गए साइबर जागरूकता अभियान के दौरान रायगढ़ जिले में विभिन्न माध्यमों से करीब 2 लाख लोगों को जागरूक किया गया। इसी अभियान के तहत युवाओं की रचनात्मकता को साइबर सुरक्षा के संदेश से जोड़ने के लिए लघु फिल्म प्रतियोगिता आयोजित की गई।
कार्यक्रम में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध की चुनौती (Cyber Crime Free Chhattisgarh) भी बढ़ रही है। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता डिजिटल सुरक्षा की मजबूत नींव है। दुर्ग सांसद विजय बघेल ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रतियोगिता के मूल्यांकन के लिए फिल्म निर्माण और रंगमंच से जुड़े विशेषज्ञों को निर्णायक मंडल में शामिल किया गया था। निर्णायकों के अनुसार प्रतियोगिता में शामिल फिल्मों की गुणवत्ता और रचनात्मकता प्रभावशाली रही तथा शीर्ष फिल्मों का चयन करना चुनौतीपूर्ण रहा।
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