ट्रेनों की निगरानी के बावजूद यात्रियों को राहत नहीं
सीजी भास्कर, 10 अक्टूबर । दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में ट्रेनों की देरी रोकने के लिए शुरू की गई हाईटेक लाइव मॉनिटरिंग व्यवस्था के बावजूद यात्रियों की परेशानी कम नहीं हुई है। 4 सितंबर से मंडल के 47 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यह व्यवस्था लागू की गई थी। इसका उद्देश्य ट्रेनों की लोकेशन पर लगातार नजर रखकर परिचालन में सुधार करना था, लेकिन कई रेलखंडों पर ट्रेनें अब भी घंटों देरी से चल रही हैं। (Bilaspur Railway)
शुरुआती पड़ताल में बिलासपुर-चांपा, चांपा-रायगढ़ और बिलासपुर-अनूपपुर रेलखंडों पर सबसे ज्यादा देरी सामने आई है।
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मालगाड़ियों का दबाव और तकनीकी समस्याएं बनी वजह : Bilaspur Railway
रेलवे के व्यस्त रेलखंडों पर मालगाड़ियों का दबाव और विकास कार्यों के कारण यात्री ट्रेनों को आउटर पर रोकना पड़ रहा है। सिग्नलिंग की समस्या, बार-बार ट्रैफिक ब्लॉक और दूसरी ट्रेनों को रास्ता देने के कारण परिचालन प्रभावित हो रहा है। एक ट्रेन के लेट होने से उसके पीछे चलने वाली दूसरी ट्रेनें भी देरी से चलने लगती हैं।
एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को प्राथमिकता मिलने के कारण लोकल और मेमू ट्रेनों को छोटे स्टेशनों की लूप लाइन पर रोकना पड़ता है। वहीं, बिलासपुर स्टेशन पर डिस्प्ले बोर्ड में बार-बार आगमन का संभावित समय बदलने से यात्रियों को ट्रेन की सही जानकारी नहीं मिल पाती।

उत्कल और वैनगंगा एक्सप्रेस में घंटों की देरी
यात्री सुनीता वर्मा के मुताबिक, कलिंग उत्कल एक्सप्रेस का निर्धारित आगमन दोपहर 12 बजे था, लेकिन ट्रेन करीब 1:30 बजे पहुंची। इस दौरान डिस्प्ले बोर्ड पर हर 15 मिनट में नया संभावित समय दिखाया जा रहा था। यात्रियों को करीब डेढ़ घंटे इंतजार करना पड़ा।
वहीं, राजेश जायसवाल ने बताया कि यशवंतपुर-कोरबा वैनगंगा एक्सप्रेस का बिलासपुर पहुंचने का समय सुबह 9:15 बजे था, लेकिन ट्रेन दोपहर 12 बजे पहुंची। करीब पौने तीन घंटे की देरी के कारण उनकी आगे की बस छूट गई। उन्होंने लंबे इंतजार के दौरान पीने के पानी और बैठने की उचित व्यवस्था नहीं होने की परेशानी भी बताई।
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आउटर पर सिग्नल और मेमू ट्रेनों की देरी से परेशानी : Bilaspur Railway
आलोक तिवारी के अनुसार, हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस का निर्धारित आगमन दोपहर 1:50 बजे था, लेकिन ट्रेन करीब 3:20 बजे बिलासपुर पहुंची। आउटर पर सिग्नल नहीं मिलने के कारण ट्रेन खड़ी रही। पूछताछ काउंटर से भी सटीक जानकारी नहीं मिल सकी।
गोंदिया-झारसुगुड़ा मेमू के यात्री अमित महतो ने बताया कि दोपहर 12:30 बजे आने वाली ट्रेन करीब 2 बजे पहुंची। एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए मेमू को छोटे स्टेशनों पर 20 से 30 मिनट तक रोक दिया जाता है, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों को परेशानी होती है।
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रेलवे ने बताई परिचालन से जुड़ी तकनीकी वजहें
बिलासपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अनुराग सिंह के अनुसार, लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम से ट्रेनों की स्थिति की बेहतर जानकारी (Bilaspur Railway) मिल रही है और आपसी समन्वय में भी सुधार हुआ है। हालांकि, ट्रेन को आउटर पर रोकने की स्थिति प्लेटफॉर्म की उपलब्धता, क्रॉसिंग और अन्य तकनीकी कारणों पर निर्भर करती है।
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