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Temple Land Compensation : रायगढ़ में 10 मंदिरों की जमीन अधिग्रहित, 2.87 करोड़ रुपये का मुआवजा वर्षों से अटका

By Newsdesk Admin
12/10/2026
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Temple Land Compensation
Temple Land Compensation : रायगढ़ में 10 मंदिरों की जमीन अधिग्रहित, 2.87 करोड़ रुपये का मुआवजा वर्षों से अटका

सीजी भास्कर, 12 अक्टूबर । रायगढ़ जिले में सरकारी परियोजनाओं के लिए 10 मंदिरों की जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन मुआवजे की राशि अब तक मंदिरों तक नहीं पहुंच पाई है। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन के मालिक के रूप में भगवान के नाम दर्ज होने और उनकी ओर से भुगतान प्राप्त करने के लिए वैधानिक प्रतिनिधि तय नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है। इन मामलों में कुल 1 करोड़ 37 लाख 94 हजार 312 रुपये का मूल मुआवजा लंबित है। (Temple Land Compensation)

Contents
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भुगतान में कानूनी अड़चन : Temple Land Compensation
  • मंदिरों की आय प्रभावित, किसानों को भी परेशानी
  • कानूनी प्रतिनिधि तय कर भुगतान का रास्ता निकालने की मांग : Temple Land Compensation

करीब नौ साल से भुगतान अटका होने के कारण ब्याज सहित यह रकम बढ़कर लगभग 2 करोड़ 86 लाख 92 हजार रुपये हो गई है। अधिग्रहण से जुड़े ज्यादातर मामले 2017 से 2020 के बीच के हैं। इनमें श्रीराम-जानकी, भगवान महादेव और जगन्नाथ महाप्रभु के मंदिरों की जमीन शामिल है।

 

यह भी पढ़ें : Ram Navami Celebration Raipur: भक्ति, रोशनी और शोभायात्रा से गूंजा शहर, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भुगतान में कानूनी अड़चन : Temple Land Compensation

6 सितंबर 2021 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, पुजारी मंदिर की संपत्ति का प्रबंधक होता है, भू-स्वामी नहीं। ऐसे में मुआवजे की राशि सीधे पुजारी को नहीं दी जा सकती। यदि मंदिर का पंजीकृत ट्रस्ट या वैधानिक प्रबंधन संस्था है, तो उसके दस्तावेजों के आधार पर भुगतान किया जा सकता है। लेकिन जहां अधिकृत प्रतिनिधि स्पष्ट नहीं है, वहां पहले यह तय करना जरूरी है कि देवता की ओर से मुआवजा प्राप्त करने का अधिकार किसे है।

राजस्व रिकॉर्ड में मंदिर के देवता का नाम भू-स्वामी के रूप में दर्ज है, जबकि देखरेख करने वाले पुजारी या अन्य व्यक्ति का नाम सर्वराकार के तौर पर है। इसी वजह से भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

 

यह भी पढ़ें : बांके बिहारी मंदिर अधिग्रहण पर विवाद : जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने यूपी सरकार को घेरा, कहा – “मंदिरों को क्यों निशाना बनाया जा रहा..?”

Temple Land Compensation
Temple Land Compensation : रायगढ़ में 10 मंदिरों की जमीन अधिग्रहित, 2.87 करोड़ रुपये का मुआवजा वर्षों से अटका

 

मंदिरों की आय प्रभावित, किसानों को भी परेशानी

अधिग्रहण (Temple Land Compensation) के बाद बची हुई जमीन कई गांवों में मंदिरों की आय का प्रमुख स्रोत है। ग्रामीण इस जमीन को खेती के लिए किसानों को देते हैं और उससे मिलने वाली राशि का उपयोग मंदिरों की रंगाई-पुताई, मरम्मत और अन्य कामों में किया जाता है।

जमीन देवता के नाम दर्ज होने के कारण किसानों को भी राजस्व रिकॉर्ड और उपज बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ जगहों पर किसानों को धान की बिक्री बिचौलियों के माध्यम से करनी पड़ती है।

टारपाली के श्रीराम-जानकी मंदिर की करीब तीन एकड़ जमीन रेलवे लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। मंदिर समिति के सदस्य पदुम लाल सोनी के मुताबिक, वर्ष 2017 में अधिग्रहण के बाद लगभग 85 लाख रुपये का मुआवजा तय हुआ, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ। वहीं, भिखारी माल स्थित महादेव बाबा शंकर मंदिर की जमीन के बदले 46 लाख 65 हजार 898 रुपये का मुआवजा लंबित है। ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर की हालत जर्जर है और उसकी देखरेख वे सामूहिक रूप से करते हैं।

 

यह भी पढ़ें : Chhattisgarh Temple Renovation : अब सरकार सुधारेगी मंदिरों की हालत, मरम्मत के लिए मिला फंड

कानूनी प्रतिनिधि तय कर भुगतान का रास्ता निकालने की मांग : Temple Land Compensation

बिलासपुर हाई कोर्ट के अधिवक्ता अनादी शर्मा के अनुसार, केवल देवता या मंदिर के नाम जमीन दर्ज होने के आधार पर मुआवजा अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है। भारतीय कानून में मंदिर के देवता को स्वतंत्र विधिक इकाई माना गया है। उनकी ओर से पुजारी, प्रबंधन समिति या मान्य ट्रस्ट प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद है, तो राशि सक्षम न्यायालय में जमा कराई जा सकती है। न्यायालय यह तय कर सकता है कि देवता की ओर से रकम प्राप्त करने और उसका उपयोग करने का अधिकार किसे है। जहां विवाद नहीं है, वहां राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर वैध प्रतिनिधि की पहचान के बाद भुगतान किया जा सकता है।

रायगढ़ के कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि तहसीलों से सभी मामलों की जानकारी मांगी गई है। राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद यह पता लगाया जाएगा कि किन प्रकरणों में भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। दस्तावेजों में कमी या अन्य समस्या होने पर उसे दूर करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

 

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