सीजी भास्कर, रायपुर, 21 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। परिसीमन (Chhattisgarh Delimitation Bill) के तहत विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव लागू होता है, तो मौजूदा 90 सीटें बढ़कर 135 हो सकती हैं। ऐसे में महिला आरक्षण (Women Reservation in Chhattisgarh) को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। यदि 135 सदस्यीय विधानसभा में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान लागू होता है, तो गणना के अनुसार 45 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। हालांकि, यह अभी संभावित गणित है। अंतिम स्थिति विधेयक के प्रावधानों और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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90 से 135 सीटों का गणित
छत्तीसगढ़ विधानसभा में फिलहाल 90 सीटें हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है, तो विधानसभा में कुल 135 सीटें हो सकती हैं। इस स्थिति में प्रदेश में 45 नए विधानसभा क्षेत्र बनने की संभावना होगी।
इसका गणित इस प्रकार है:
- वर्तमान विधानसभा सीटें: 90
- संभावित अतिरिक्त सीटें: 45
- प्रस्तावित कुल सीटें: 135
निर्वाचन क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन होने पर मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं में भी बदलाव हो सकता है। कुछ क्षेत्रों का पुनर्गठन हो सकता है और नए निर्वाचन क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। हालांकि, वास्तविक संख्या और सीमाएं आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगी।
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45 सीटों का पूरा हिसाब
महिला आरक्षण (Women Reservation in Chhattisgarh) के तहत यदि विधानसभा की कुल 135 सीटों में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान लागू होता है, तो महिलाओं के लिए 45 सीटें आरक्षित हो सकती हैं।
इसे आसान तरीके से समझें
- प्रस्तावित कुल सीटें: 135
- महिला आरक्षण: एक-तिहाई यानी लगभग 33.33 प्रतिशत
- संभावित महिला आरक्षित सीटें: 45
यानी 135 का एक-तिहाई 45 होता है। लेकिन इस गणना को अंतिम आरक्षण सूची नहीं माना जा सकता। सीटों की संख्या बढ़ने और आरक्षण के प्रावधान लागू होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
भाजपा-कांग्रेस की रणनीति बदलेगी
विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ने पर भाजपा और कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों को अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। नए विधानसभा क्षेत्र बनने से उम्मीदवारों के चयन, संगठनात्मक विस्तार और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है।
रायपुर और दुर्ग जैसे शहरी क्षेत्रों से लेकर बस्तर और सरगुजा के दूरस्थ इलाकों तक परिसीमन का प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। नए क्षेत्र बनने से स्थानीय नेताओं को चुनाव लड़ने के अवसर मिल सकते हैं। वहीं, मौजूदा विधायकों को अपने जनाधार और राजनीतिक प्रभाव को नए निर्वाचन क्षेत्रों के हिसाब से मजबूत करना पड़ सकता है।
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महिलाओं को मिलेगा अधिक प्रतिनिधित्व
यदि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होती है, तो विधानसभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के अवसर बढ़ सकते हैं। 90 सदस्यीय विधानसभा में एक-तिहाई का गणित 30 सीटें बनता है, जबकि 135 सदस्यीय विधानसभा में यही अनुपात 45 सीटें होगा। हालांकि, महिला आरक्षण (Women Reservation in Chhattisgarh) की वास्तविक स्थिति केवल इस गणना से तय नहीं होगी। इसके लिए लागू कानून, परिसीमन की प्रक्रिया और निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण से जुड़े प्रावधानों को देखना होगा। आरक्षित सीटों की अंतिम सूची सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन विधानसभा क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होगा।
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परिसीमन आयोग के पूर्व सदस्य ने क्या कहा
परिसीमन आयोग के पूर्व सदस्य सुशील त्रिवेदी के अनुसार, प्रस्तावित परिसीमन में विधानसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात सामने आई है। उन्होंने परिसीमन के संदर्भ में वर्ष 2011 की जनगणना का उल्लेख किए जाने की बात भी कही। उनके मुताबिक, परिसीमन किस आधार पर होगा और निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण किस तरह किया जाएगा, यह संबंधित विधेयक के प्रावधानों से स्पष्ट होगा। विधेयक के पारित होने और आगे की प्रक्रिया पूरी होने से पहले अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
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अब विधेयक पर सबकी निगाहें
छत्तीसगढ़ में परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर आगे की स्थिति संबंधित विधेयक, कानूनी प्रक्रिया और आधिकारिक निर्णयों से स्पष्ट होगी। यदि विधानसभा की सीटें बढ़कर 135 होती हैं और एक-तिहाई सीटों पर महिला आरक्षण का प्रावधान लागू होता है, तो महिलाओं के लिए 45 सीटों का गणित बनता है। फिलहाल इसे संभावित व्यवस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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