सीजी भास्कर, 04 सितंबर : जातिगत जनगणना को लेकर देश में बहस (OBC Census) तेज है। अब इसमें पिछड़े वर्ग की हिस्सेदारी और पहचान को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने OBC की पहचान (OBC Census) को लेकर केंद्र सरकार की व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि केवल जाति की जानकारी दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पिछड़े समाज की संख्या का स्पष्ट और विश्वसनीय आंकड़ा सामने आना जरूरी है।

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OBC के लिए स्पष्ट वर्गीकरण क्यों नहीं? OBC Census
विनोद चंद्राकर ने कहा कि केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 में जातिगत आंकड़े जुटाने का निर्णय लिया है। यह सामाजिक न्याय की लंबे समय से चली आ रही मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन यदि जाति की जानकारी दर्ज करने के दौरान OBC के लिए अलग और स्पष्ट वर्गीकरण नहीं होगा, तो पिछड़े समाज की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने लाने में परेशानी हो सकती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार जातिगत आंकड़े जुटाने जा रही है, तो OBC वर्गीकरण (OBC Census) की स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है। केंद्र सरकार को देश के पिछड़े वर्गों के सामने इस सवाल का जवाब देना चाहिए।
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जाति-उपजाति के आंकड़ों का वैज्ञानिक वर्गीकरण जरूरी
चंद्राकर ने कहा कि भारत जैसे बड़े और विविध देश में अलग-अलग जातियों, उपजातियों और स्थानीय नामों के कारण आंकड़ों का वैज्ञानिक वर्गीकरण बेहद महत्वपूर्ण है। यदि वर्गीकरण स्पष्ट नहीं होगा तो जातिगत आंकड़ों को व्यवस्थित तरीके से सामने लाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उनका कहना है कि OBC जनगणना (OBC Census) से जुड़े आंकड़े स्पष्ट होने पर ही सामाजिक न्याय की नीतियों को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
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आरक्षण और हिस्सेदारी से भी जुड़ा है मुद्दा
पूर्व विधायक ने कहा कि OBC समाज को केवल चुनाव के समय याद करना पर्याप्त नहीं है। सामाजिक न्याय, आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में प्रभावी भागीदारी के लिए विभिन्न सामाजिक वर्गों की वास्तविक जनसंख्या का पता होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि OBC समाज देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में उसकी जनसंख्या के विश्वसनीय आंकड़े सामने आना जरूरी है।
कांग्रेस लंबे समय से उठा रही जातिगत जनगणना का मुद्दा
चंद्राकर ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से सामाजिक न्याय और जातिगत जनगणना की मांग करती रही है। राहुल गांधी ने भी जातिगत जनगणना और आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी का मुद्दा राष्ट्रीय बहस के केंद्र में रखा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि जातिगत गणना पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से कराई जाए। OBC की स्पष्ट पहचान (OBC Census) के बिना पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति को समझना मुश्किल होगा।
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केंद्र से की स्पष्ट व्यवस्था की मांग
विनोद चंद्राकर ने केंद्र सरकार से मांग की कि जनगणना-2027 में OBC की स्पष्ट, पृथक और वैज्ञानिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रावधान किए जाएं। इससे पिछड़े वर्गों की वास्तविक जनसंख्या सामने आ सकेगी।
उन्होंने कहा कि इसके आधार पर अधिकार, प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस नीतियां बनाई जा सकती हैं।
‘OBC समाज अब अपने अधिकारों का हिसाब चाहता है’
पूर्व विधायक ने कहा कि OBC समाज अब केवल वोट बैंक नहीं है। वह अपने अधिकार, सम्मान और हिस्सेदारी का हिसाब चाहता है। केंद्र सरकार को इस मांग से बचने के बजाय इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
अब जातिगत जनगणना-2027 में OBC की पहचान और वर्गीकरण किस तरह किया जाता है, इस पर पिछड़े वर्गों की नजर बनी हुई है।




