सीजी भास्कर, 04 सितंबर : बिजली के बढ़ते खर्च को लेकर सरकार पर सियासी हमला तेज (Smart Meter) हो गया है। आम आदमी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उत्तम जायसवाल ने स्मार्ट मीटर व्यवस्था (Smart Meter), बढ़ी हुई बिजली दरों और बिजली वितरण में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जनता पहले ही महंगे बिजली बिलों से परेशान है और अब बिजली व्यवस्था में निजीकरण की दिशा में बढ़ते कदम चिंता बढ़ा रहे हैं।

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पहले टैरिफ बढ़ाया, अब निजीकरण का सवाल Smart Meter
उत्तम जायसवाल ने कहा कि सरकार ने 1 जुलाई से बिजली की दरों में औसतन 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ा है। उनका आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल अचानक कई गुना बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि पहले बिजली की कीमतें बढ़ाई गईं और 400 यूनिट तक मिलने वाली छूट भी खत्म की गई। अब बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों के प्रवेश की संभावना दिखाई दे रही है। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का भविष्य क्या होगा।
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Tata Power के आवेदन पर भी उठाए सवाल
आप नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग यानी CSERC में टाटा पावर द्वारा रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों के लिए वितरण लाइसेंस का आवेदन किया गया है। उन्होंने इसे बिजली वितरण के क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका का गंभीर संकेत बताया।
उनका सवाल है कि जब सरकार के पास पहले से सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था है, तो निजी कंपनियों को वितरण का अधिकार देने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या इससे आने वाले समय में उपभोक्ताओं पर बिजली का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा?
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‘स्मार्ट मीटर का उद्देश्य पारदर्शिता था, फिर बिल क्यों बढ़े?’
उत्तम जायसवाल ने स्मार्ट मीटर से बढ़े बिल (Smart Meter) को लेकर स्वतंत्र जांच और ऑडिट की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर का उद्देश्य पारदर्शिता और सही बिलिंग बताया गया था।
ऐसे में यदि उपभोक्ताओं के बिल अचानक कई गुना बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो सरकार को इसकी निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उपभोक्ताओं को यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि बिल बढ़ने की वास्तविक वजह क्या है।
उन्होंने केंद्र की RDSS योजना का भी जिक्र करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटरिंग को बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार का हिस्सा बताया गया है। इसलिए उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए।
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पावर ट्रांसमिशन कंपनी के IPO पर भी सवाल
आप नेता ने कहा कि मंत्रिमंडल की ओर से पावर ट्रांसमिशन कंपनी का IPO लाकर शेयर बेचने का फैसला भी किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है, तब सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने और बिजली वितरण में निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ाने की दिशा क्यों अपनाई जा रही है?
उनका आरोप है कि बिजली व्यवस्था का निजीकरण (Smart Meter) आगे चलकर उपभोक्ताओं के लिए महंगा साबित हो सकता है। हालांकि निजी वितरण से जुड़े प्रस्तावों और उनके संभावित प्रभाव पर अंतिम स्थिति संबंधित नियामकीय प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
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आप की तीन बड़ी मांगें
आम आदमी पार्टी ने सरकार से बढ़ी हुई बिजली दरों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि स्मार्ट मीटर से जुड़े बढ़े हुए बिजली बिलों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
इसके साथ ही बिजली वितरण में निजी कंपनियों को लाइसेंस देने की प्रक्रिया से जुड़ी पूरी जानकारी जनता के सामने पारदर्शी तरीके से रखी जानी चाहिए। स्मार्ट मीटर व्यवस्था (Smart Meter) से जुड़े उपभोक्ता शिकायतों का भी प्रभावी समाधान किया जाए।
‘क्या बुनियादी सुविधा भी मुनाफे का कारोबार बनेगी?’
उत्तम जायसवाल ने सरकार से सवाल किया कि क्या बिजली जैसी बुनियादी जरूरत को भी आने वाले समय में मुनाफे के कारोबार में बदल दिया जाएगा? उन्होंने कहा कि सरकार को सबसे पहले उपभोक्ताओं के हितों और उनकी जेब पर पड़ रहे बोझ की चिंता करनी चाहिए।
अब बढ़ी बिजली दरों, स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों और निजी वितरण लाइसेंस की प्रक्रिया पर सरकार का अगला कदम क्या होगा, इस पर उपभोक्ताओं की नजर बनी हुई है।



