सीजी भास्कर, 26 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के करका वन क्षेत्र में क्षतिग्रस्त पेड़ों को बचाने के लिए विशेष अभियान (Tree Treatment) चलाया जा रहा है। यहां छाल काटे जाने से प्रभावित 3500 पेड़ों का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाएगा। वन विभाग के साथ विशेषज्ञों की टीम उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पेड़ों को बचाने में जुटी है।

गर्डलिंग से पेड़ों को पहुंचा नुकसान Tree Treatment
पेड़ों के तने के चारों ओर छाल काटने की प्रक्रिया को गर्डलिंग कहा जाता है। इससे पेड़ों तक भोजन और पोषक तत्व पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। नुकसान गंभीर होने पर पेड़ सूखकर मर भी सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए उपचार शुरू किया गया है।
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विशेषज्ञों की मदद से हो रहा उपचार
बेंगलुरु के वृक्ष संरक्षण विशेषज्ञ विजय निशांत और उनकी संस्था प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन तकनीकी सहयोग (Tree Treatment) दे रहे हैं। सभी 3500 पेड़ों की स्थिति का आकलन कर प्रजाति, उम्र, तने की मोटाई और नुकसान के आधार पर उपचार तय किया जा रहा है। हर पेड़ को क्रमांक देकर उसका रिकॉर्ड भी तैयार किया गया है।
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ब्रिज ग्राफ्टिंग से बचाने की कोशिश
पेड़ों के उपचार में ब्रिज ग्राफ्टिंग, ट्री बैंडेजिंग और घावों की देखभाल जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ब्रिज ग्राफ्टिंग से क्षतिग्रस्त तने में जीवित ऊतकों के बीच संपर्क बहाल करने की कोशिश की जाती है, जिससे पोषक तत्वों का परिवहन दोबारा शुरू होने में मदद मिल सकती है।
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100 से अधिक वनकर्मी अभियान में जुटे
इस अभियान में 100 से अधिक वनकर्मी और वृक्ष संरक्षण विशेषज्ञ काम (Tree Treatment) कर रहे हैं। इसका उद्देश्य पेड़ों को बचाने के साथ वनकर्मियों को वैज्ञानिक उपचार का प्रशिक्षण देना भी है। उपचार के बाद पेड़ों की नियमित निगरानी की जाएगी।
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