सीजी भास्कर, 31 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादी का वादा पूरा नहीं होने से जुड़े मामले में अहम फैसला (Chhattisgarh High Court) सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर मामले में शादी का वादा टूटने को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी करने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए पीड़िता की अपील खारिज कर दी।

2021 में हुई थी मुलाकात Chhattisgarh High Court
मामले के मुताबिक, पीड़िता की मुलाकात जून 2021 में जगदलपुर के एक संगीत समूह से जुड़े हिमांशु झा से हुई थी। पीड़िता का आरोप था कि आरोपी ने शादी का भरोसा दिलाकर अगस्त 2021 से अप्रैल 2024 के बीच कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में शादी से इनकार करने पर उसने शिकायत दर्ज कराई।
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ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज (Chhattisgarh High Court) किया था। सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को बरी कर दिया। इसके खिलाफ पीड़िता ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
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सहमति से बने संबंधों पर अदालत की टिप्पणी
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास और जस्टिस सुधीर कुमार की खंडपीठ ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। अदालत के अनुसार, पीड़िता के बयान में पहली बार शारीरिक संबंध जबरदस्ती होने की बात सामने नहीं आई। दोनों के बीच लंबे समय तक संबंध रहे थे। हाईकोर्ट ने माना कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का पर्याप्त आधार (Chhattisgarh High Court) नहीं है। इसी के साथ आरोपी को बरी करने का निर्णय बरकरार रखा गया।
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