सीजी भास्कर 5 सितम्बर
नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि वह भारतीय नागरिक बनने से पहले ही मतदाता सूची में शामिल हो गई थीं।
इसी मामले को लेकर दिल्ली की एक अदालत में याचिका दाखिल की गई है, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।मामला क्या है?
याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज किया गया था। जबकि वह आधिकारिक तौर पर अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिक बनीं।
वकील की दलील है कि यदि 1980 में उनका नाम मतदाता सूची में था, तो इसका मतलब है कि उस समय कुछ दस्तावेज़ जाली तौर पर दाखिल किए गए होंगे।कोर्ट में सुनवाई
मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई, जहां अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। अभी तक न तो सोनिया गांधी और न ही दिल्ली पुलिस को कोई औपचारिक नोटिस जारी किया गया है।
वकील का आरोप
याचिकाकर्ता का कहना है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में वोटर लिस्ट में जोड़ा गया, फिर 1982 में हटा दिया गया और 1983 में दोबारा शामिल कर लिया गया। वकील के मुताबिक, यह प्रक्रिया सवाल खड़े करती है और इसे "गंभीर आपराधिक कृत्य" माना जाना चाहिए।आगे क्या होगा?
अब सबकी निगाहें 10 सितंबर पर टिकी हैं, जब कोर्ट इस मामले में अगला कदम तय करेगा। यदि अदालत को आरोपों में दम नजर आता है, तो इस मामले में सोनिया गांधी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।




