सीजी भास्कर, 20 सितंबर। सुबह की शांति अचानक चीख-पुकार में बदल गई। गांव के लोग यह समझ भी नहीं पाए कि चंद सेकंड में सबकुछ कैसे बदल गया। एक महिला जो रोज़ की तरह जंगल से मशरूम बीनकर लौट रही थी, उसके कदम इस बार घर तक नहीं पहुंच पाए। उसे रास्ते में (Elephant Attack) का सामना करना पड़ा, जिसने पूरे गांव को हिलाकर रख दिया।
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुडुकेला जंगलपारा गांव की 44 वर्षीय ज्योति मिंज शनिवार सुबह मशरूम बीनने के बाद लौट रही थीं। जैसे ही वह घर से लगभग 200 मीटर दूर पहुंचीं, अचानक झाड़ियों से निकलकर आए हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हाथी का यह (Elephant Attack) इतना तेज और अप्रत्याशित था कि ज्योति मिंज गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनकी चीखें सुनकर आसपास के ग्रामीण दौड़े और वन विभाग को सूचना दी।
ग्रामीणों की मदद से महिला को तुरंत एंबुलेंस द्वारा कुनकुरी के होलीक्रॉस अस्पताल लाया गया। हालांकि, डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। महिला की मौत की खबर फैलते ही गांव में मातम और दहशत का माहौल बन गया। इलाके के लोगों में गुस्सा है कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद इस तरह के (Elephant Attack) लगातार हो रहे हैं और वन विभाग की सतर्कता सवालों के घेरे में है।
वन विभाग का कहना है कि हाथियों के विचरण को लेकर लगातार अलर्ट जारी किया जाता है। सोशल मीडिया, ग्राम पंचायत और अन्य संचार माध्यमों से ग्रामीणों को सावधान किया जाता है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और घायल महिला को अस्पताल भेजा गया। विभाग का मानना है कि ग्रामीण जंगल में जाते समय एहतियात नहीं बरतते, जिसकी वजह से ऐसे हादसे सामने आ रहे हैं। हालांकि, यह दावा स्थानीय लोगों के गुस्से को शांत नहीं कर पा रहा।
उल्लेखनीय है कि जशपुर जिला छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा हाथी प्रभावित इलाकों में गिना जाता है। ओडिसा और झारखंड की सीमा से लगे इस जिले में साल के बारहों महीने हाथियों की हलचल बनी रहती है। आठ ब्लॉकों में से पांच ब्लॉकों में (Elephant Attack) का खतरा हमेशा मंडराता है। लगातार घटनाओं ने लोगों के दिलों में गहरी दहशत पैदा कर दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार और वन विभाग को सिर्फ चेतावनी जारी करने से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने होंगे। गांवों में निगरानी और सुरक्षा इंतज़ाम बढ़ाने की मांग ज़ोर पकड़ रही है। लोग चाहते हैं कि ऐसी घटनाओं पर तुरंत काबू पाने के लिए विशेष टीम बनाई जाए।
ज्योति मिंज की मौत ने एक बार फिर जंगल और गांवों में इंसान और हाथी के टकराव की गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है। हर साल दर्जनों लोग (Elephant Attack) का शिकार हो रहे हैं और अब समय आ गया है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।



