केंद्र सरकार ने Gondia–Dongargarh Fourth Rail Line (गोंदिया–डोंगरगढ़ चौथी रेललाइन) परियोजना को हरी झंडी दे दी है। लगभग 84 किलोमीटर लंबा यह रेल कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव और महाराष्ट्र के गोंदिया जिले से होकर गुजरेगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,223 करोड़ रुपये है और अगले पांच वर्षों में इसके पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पुल, सुरंग और आधुनिक ढांचा होगा तैयार
योजना के तहत 15 बड़े पुल, 123 छोटे पुल, एक सुरंग, तीन रोड ओवरब्रिज (ROB) और 22 रोड अंडरब्रिज (RUB) बनाए जाएंगे। इससे न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी बल्कि मालवाहन ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। विशेषकर आकांक्षी जिला राजनांदगांव के लिए यह परियोजना स्थानीय व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसर खोलने वाली साबित होगी।
सालाना 30.6 मिलियन टन माल परिवहन की क्षमता
Gondia–Dongargarh Fourth Rail Line के पूरा होने के बाद रेलवे की परिवहन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। अनुमान है कि हर साल करीब 30.6 मिलियन टन अतिरिक्त माल की ढुलाई संभव हो सकेगी। इससे न सिर्फ रेलवे की आय बढ़ेगी बल्कि प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों को कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आपूर्ति भी तेज और सुगम हो जाएगी।
पर्यावरण संरक्षण और डीजल की बचत
इस परियोजना का असर पर्यावरण पर भी सकारात्मक रहेगा। अनुमानित तौर पर प्रतिवर्ष 23 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी होगी और करीब 4.6 करोड़ लीटर डीजल की बचत संभव होगी। इससे लगभग 514 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक लागत घटेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कटौती हर साल एक करोड़ पेड़ों द्वारा कार्बन अवशोषण के बराबर होगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताया आभार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए प्रधानमंत्री और रेल मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगी और मध्य भारत के औद्योगिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगी।
उन्होंने बताया कि नई रेललाइन से रायगढ़, मांड, कोरबा और इब घाटी की खदानों से कोयला परिवहन की गति बढ़ेगी। इससे महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के थर्मल पावर प्लांटों को कोयले की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
औद्योगिक प्रगति और संतुलित विकास की राह
सरकार का मानना है कि इस परियोजना से प्रदेश की खनिज अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक तंत्र को स्थायित्व मिलेगा। साथ ही, आम नागरिकों को बेहतर आवागमन सुविधा, व्यापार को गति और पर्यावरणीय संतुलन जैसे फायदे मिलेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रोजेक्ट सतत विकास (Sustainable Development) की दिशा में एक बड़ा कदम है।


