सीजी भास्कर, 29 नवंबर | रायपुर में “NIT Chowpatty Dispute” लगातार तूल पकड़ रहा है। विधायक राजेश मूणत के पोस्टर पर कालिख पोते जाने के बाद दर्ज की गई FIR के विरोध में यूथ कांग्रेस और NSUI ने बुधवार शाम सरस्वती नगर थाना का घेराव कर दिया। कार्यकर्ताओं ने थाने के बाहर जमा होकर यह आरोप दोहराया कि FIR “एकतरफा” है और चौपाटी हटाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई से बचा जा रहा है।
- जांच समिति की मांग, 7 दिन की चेतावनी
- NIT Chowpatty Dispute : 26 नवंबर से शुरू हुआ विवाद—पोस्टर पर कालिख के बाद मामला गरमाया
- चौपाटी हटाने पर विपक्ष लगातार हमलावर
- NIT Chowpatty Dispute : कांग्रेस की मुख्य मांगें – ‘नीति स्पष्ट करो, जिम्मेदारी तय करो’
- नालंदा-2 का प्रोजेक्ट और 32 दुकानदारों को नोटिस
- अगले कुछ दिन निर्णायक—विरोध से लेकर प्रशासनिक बैठकें तक जारी
जांच समिति की मांग, 7 दिन की चेतावनी
प्रदर्शन में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने कहा कि चौपाटी शिफ्टिंग को लेकर कई निर्णय बिना स्पष्ट प्रक्रिया के लिए गए, ऐसे में एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन ज़रूरी है। उनका कहना था कि यदि सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि चौपाटी हटाने की प्रक्रिया में “प्रशासनिक दबाव” और “एकतरफा निर्णय” लिए गए, जिसके कारण व्यापारी भी भारी नुकसान झेल रहे हैं।
NIT Chowpatty Dispute : 26 नवंबर से शुरू हुआ विवाद—पोस्टर पर कालिख के बाद मामला गरमाया
पूरा घटनाक्रम 26 नवंबर को शुरू हुआ था, जब नालंदा परिसर से जुड़ी घोषणा का एक बड़ा होर्डिंग लगाया गया। इसी पोस्टर पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चौपाटी शिफ्टिंग के विरोध में विधायक मूणत की फोटो पर कालिख पोत दी थी।
इसके बाद पुलिस ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज कर दी, जिसके बाद मामला और भड़क गया।
चौपाटी हटाने पर विपक्ष लगातार हमलावर
एनआईटी चौपाटी को हटाकर दुकानों को आमानाका शिफ्ट करने के निर्णय को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि पहले अधिकारियों ने चौपाटी को अनुमति दी और बाद में खुद ही उसे अवैध घोषित कर दिया।
कुछ दिन पहले कांग्रेस नेताओं ने डिप्टी सीएम से भी मुलाकात कर “Poster Blackening Issue” और चौपाटी विवाद दोनों की संयुक्त जांच की मांग रखी थी।
NIT Chowpatty Dispute : कांग्रेस की मुख्य मांगें – ‘नीति स्पष्ट करो, जिम्मेदारी तय करो’
प्रदर्शनकारियों ने चार प्रमुख मांगें सामने रखीं—
- चौपाटी विवाद की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
- कथित राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने वाले जनप्रतिनिधियों की भूमिका की जांच
- चौपाटियों और अस्थायी दुकानों के लिए भविष्य की स्पष्ट नीति जारी की जाए
नालंदा-2 का प्रोजेक्ट और 32 दुकानदारों को नोटिस
नवंबर 2025 में नगरीय प्रशासन ने नालंदा-2 प्रोजेक्ट के लिए टेंडर को अंतिम रूप दे दिया था। 15 नवंबर से चौपाटी शिफ्टिंग की तारीख तय कर दी गई, लेकिन उससे पहले ही रेलवे ने मैदान के दावे में 32 दुकानदारों को नोटिस भेज दिया।
रेलवे और नगर निगम के बीच अब भी बातचीत जारी है ताकि किसी प्रकार की अनियमितता या विवाद को बिना टकराव के हल किया जा सके।
यह पूरा मामला अब “Chowpatty Relocation Matter” के रूप में सामने आ रहा है, जो प्रशासनिक निर्णयों की प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
अगले कुछ दिन निर्णायक—विरोध से लेकर प्रशासनिक बैठकें तक जारी
थाने में घेराव, जांच की मांग और दुकानदारों के हितों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह विवाद अब शहर के लिए मुख्य राजनीतिक मुद्दा बन गया है। अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई, समिति गठन और FIR वाले प्रकरण में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक स्पष्ट नीति और पारदर्शी प्रक्रिया सामने नहीं आती, यह विवाद शांत होने की संभावना कम ही है।





