रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में हाल ही में प्राचार्य, व्याख्याता और प्रधानपाठक जैसे शैक्षणिक पदों पर जहां बड़े पैमाने पर पदोन्नतियाँ की गईं, वहीं लिपिक वर्गीय कर्मचारियों की पदोन्नति एक बार फिर अधर में लटक गई है। जनवरी 2024 में जारी हुए विभागीय निर्देशों के बावजूद Clerical Promotion Issue लगातार बना हुआ है, जिससे कर्मचारियों में निराशा और असंतोष दोनों बढ़ रहे हैं।
दुर्ग संभाग में रिक्त पद वर्षों से इंतज़ार में
संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग, दुर्ग के दफ्तर में वरिष्ठ लेखा परीक्षक और सहायक ग्रेड-1 के कई पद लंबे समय से खाली हैं। इन पदों के रिक्त रहने के बावजूद पदोन्नति प्रक्रिया पर ठोस कार्रवाई नहीं होना, कर्मचारियों के अनुसार, “अनुचित देरी” का संकेत देता है।
लिपिक वर्ग के अनुसार, उच्च पदों पर नियमित प्रमोशन देते हुए भी वर्षों से लंबित यह clerical backlog समझ से परे है।
Clerical Promotion Issue : अन्य संवर्गों की तुलना में भेदभाव की भावना प्रबल
कर्मचारियों का कहना है कि शिक्षकीय कैडर में लगातार प्रमोशन जारी हैं, लेकिन लिपिक वर्गीय कर्मचारियों की फाइलें बिना किसी स्पष्ट कारण के अटकी हुई हैं।
इस वजह से कर्मचारियों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि उन्हें दूसरे संवर्गों के मुकाबले कम प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे inter-cadre inequality की स्थिति बनती दिखाई देती है।
कर्मचारी संगठनों ने कलेक्टर को भेजा पत्र
स्थिति को गंभीर मानते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, जिला शाखा दुर्ग के अध्यक्ष तथा छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के मीडिया प्रभारी भानुप्रताप यादव ने कलेक्टर दुर्ग को पत्र लिखकर, लिपिक वर्ग की पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग उठाई है।
संगठन का कहना है कि लंबित प्रस्तावों पर कार्रवाई न होने से कार्यस्थल का माहौल प्रभावित हो रहा है और कर्मचारी मानसिक रूप से दबाव में आ रहे हैं।
Clerical Promotion Issue : सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा
कर्मचारियों ने उम्मीद जताई है कि विभाग जल्द ही लिपिक वर्गीय पदोन्नति से जुड़ी फाइलों को प्राथमिकता देगा, ताकि लंबे समय से खिंच रहे इस promotion delay का समाधान हो सके और विभागीय कार्यप्रणाली सुचारु रहे।


