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Home » Eco–Religious Tourism : तुरतुरिया में इको–रिलीज़ियस टूरिज्म की शुरुआत

Eco–Religious Tourism : तुरतुरिया में इको–रिलीज़ियस टूरिज्म की शुरुआत

By Newsdesk Admin
04/01/2026
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सीजी भास्कर, 4 जनवरी। प्रकृति का सम्मान करते हुए स्थानीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और वन्यजीवों को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाए बिना पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बलौदाबाजार जिले के वन परिक्षेत्र बल्दाकछार अंतर्गत स्थित सुप्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल तुरतुरिया में इको–रिलीज़ियस टूरिज्म (Eco–Religious Tourism) की अवधारणा को धरातल पर उतारा गया है। इस नवाचारी पहल का संचालन “तुरतुरिया संयुक्त वन प्रबंधन एवं पर्यटन समिति” के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय सहभागिता और जिम्मेदारी भी सुनिश्चित हो रही है।

Contents
  • पर्यटन प्रबंधन समिति का गठन और संरचना
  • पॉलीथिन मुक्त तुरतुरिया की पहल
  • भविष्य की योजनाएं

प्रत्येक वर्ष पौष पूर्णिमा के अवसर पर तुरतुरिया में आयोजित होने वाला तीन दिवसीय मेला इस वर्ष 2 से 04 जनवरी 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान इको–रिलीज़ियस टूरिज्म (Eco–Religious Tourism) मॉडल के तहत पर्यटकों की सुव्यवस्थित आवाजाही, स्वच्छता और पर्यावरणीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

पर्यटन प्रबंधन समिति का गठन और संरचना

तुरतुरिया पर्यटन प्रबंधन हेतु गठित समिति में आसपास के पाँच ग्राम—खुड़मुड़ी, बफरा, पैरागुड़ा, भिंभोरी एवं ठाकुरदिया—के कुल 21 सदस्यों को शामिल किया गया है। समिति में महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। नियमानुसार समिति को न केवल दायित्व सौंपे गए हैं, बल्कि प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक अधिकार भी प्रदान किए गए हैं, जिससे इको–रिलीज़ियस टूरिज्म (Eco–Religious Tourism) का संचालन स्थानीय स्तर पर पारदर्शी और उत्तरदायित्वपूर्ण ढंग से किया जा सके।

समिति द्वारा तुरतुरिया आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए वाहनों की सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही सुलभ शौचालयों का प्रबंधन, नियमित साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने का कार्य भी सक्रिय रूप से किया जा रहा है।

इस पर्यटन प्रबंधन समिति द्वारा कार्य 23 दिसंबर 2025 से प्रारंभ किया गया है और मात्र एक सप्ताह के भीतर पीक टूरिस्ट सीज़न के दौरान समिति ने लगभग 70 हजार रुपये की आय अर्जित की है, जो इको–रिलीज़ियस टूरिज्म (Eco–Religious Tourism) मॉडल की व्यवहारिक सफलता को दर्शाता है।

पॉलीथिन मुक्त तुरतुरिया की पहल

“पॉलीथिन मुक्त तुरतुरिया” की संकल्पना को साकार करते हुए समिति द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न स्थानों पर बांस से निर्मित कूड़ादान स्थापित किए जा रहे हैं तथा प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित किया जा रहा है। पोस्टर, बैनर और साइन बोर्ड के माध्यम से पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को जागरूक किया जा रहा है, जिससे इको–रिलीज़ियस टूरिज्म (Eco–Religious Tourism) के मूल उद्देश्य को मजबूती मिल रही है।

इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं। इससे पर्यटन के साथ-साथ आजीविका संवर्धन को भी बढ़ावा मिल रहा है। तुरतुरिया, बारनवापारा अभ्यारण्य से सटे होने के कारण यहाँ वन्यप्राणियों की उपस्थिति भी देखने को मिलती है और पर्यटक प्राकृतिक परिवेश में उनका सहज अवलोकन कर पा रहे हैं। स्थल पर विकसित गार्डन क्षेत्र पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

भविष्य की योजनाएं

भविष्य में पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए समिति द्वारा किचन शेड निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वनमण्डलाधिकारी गणवीर धम्मशील के अनुसार, आगे चलकर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और विकास से जुड़ी अन्य गतिविधियों को भी चरणबद्ध रूप से संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सहयोग से पुरातात्विक सर्वेक्षण की संभावनाओं पर भी कार्य किया जाएगा, जिससे इको–रिलीज़ियस टूरिज्म (Eco–Religious Tourism) के तहत तुरतुरिया को एक सतत, स्वच्छ और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।

उल्लेखनीय है कि तुरतुरिया धार्मिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधिकारी जे.डी. बेगलर ने अपने सर्वेक्षण प्रतिवेदन (1874–75 एवं 1875–76) में यहाँ बौद्धकालीन अवशेषों और बुद्ध की प्राचीन प्रतिमा की उपस्थिति का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, उस काल में इस स्थल का प्रबंधन बौद्ध भिक्षुणियों द्वारा किया जाता था, जो तुरतुरिया की ऐतिहासिक गरिमा को और अधिक पुष्ट करता है।

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