रायपुर। (Chhattisgarh Soil Tilak Budget) पेश करने से पहले प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने एक प्रतीकात्मक कदम उठाया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की मिट्टी का तिलक लगाकर विधानसभा की ओर प्रस्थान किया। इसे महज औपचारिकता नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ाव का सार्वजनिक संकेत माना जा रहा है, जो बजट जैसे गंभीर अवसर पर एक अलग भाव पैदा करता है।
छत्तीसगढ़ महतारी का आशीर्वाद लेकर पहुंचे सदन
विधानसभा रवाना होने से पहले मंत्री ने अपने निवास स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना की और छत्तीसगढ़ महतारी का स्मरण करते हुए आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनकी पत्नी अदिति चौधरी भी साथ मौजूद रहीं। राजनीतिक हलकों में इसे (Cultural Symbolism in Budget) के रूप में देखा जा रहा है, जहां नीति से पहले परंपरा को सम्मान दिया गया।
जैकेट में दिखी निजी पसंद की झलक
इस मौके पर मंत्री जिस जैकेट में नजर आए, वह उनकी पत्नी की पसंद बताई जा रही है। विधानसभा की सीढ़ियों पर उतरते समय उनका यह अंदाज़ चर्चा का विषय बना रहा। जानकारों के मुताबिक, ऐसे छोटे निजी संकेत (Personal Touch in Politics) के जरिए जनमानस से जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश भी मानी जाती है।
कविता से हुई बजट भाषण की शुरुआत
बजट भाषण की शुरुआत मंत्री ने कविता से की—“ना चंदन से, ना कुमकुम से… मैं अपने छत्तीसगढ़ की माटी का तिलक लगाकर आया हूं।” सदन में इस पंक्ति ने माहौल को एक क्षण के लिए भावुक कर दिया। इसे (Cultural Identity in Governance) की अभिव्यक्ति के तौर पर देखा गया, जहां आर्थिक दस्तावेज़ से पहले सांस्कृतिक भाव रखा गया।
सदन में दिखा अलग अंदाज़ का संदेश
विधानसभा परिसर में मौजूद विधायकों और अधिकारियों के बीच यह चर्चा रही कि बजट पेश करने से पहले ऐसा प्रतीकात्मक कदम विरला होता है। इसे परंपरा और नीति के संगम का संकेत बताया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि (Symbolic Gesture in Public Office) कभी-कभी सरकारी दस्तावेज़ से ज़्यादा दूर तक संदेश पहुंचा देता है।






