सीजी भास्कर 27 फ़रवरी Chhattisgarh Budget Session: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने बजट में शामिल कार्यों को वित्तीय स्वीकृति देने की रफ्तार पर सवाल उठाया। विपक्ष का कहना था कि विभागीय प्रस्ताव आगे बढ़ तो रहे हैं, लेकिन फाइलें वित्त विभाग में जाकर अटक जाती हैं—यही (Budget Approval Delay) का असल दर्द है।
वित्त मंत्री का जवाब—“कोई फाइल लंबित नहीं”
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में कहा कि वित्त विभाग में कोई भी कार्य लंबित नहीं है। उनके मुताबिक, सरकार ने प्रक्रियाओं को तेज करने के लिए सीमा भी बढ़ाई है—मशीन-उपकरण मद 50 हजार से बढ़ाकर 1 करोड़, और प्रशासकीय स्वीकृति 2 करोड़ से 5 करोड़ कर दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे (Financial Sanction Process) सरल हुआ है।
विपक्ष ने गिनाई विभागीय अड़चनें
कांग्रेस विधायकों ने सिंचाई और लोक निर्माण विभाग के उदाहरण देकर कहा कि जमीन पर काम शुरू होने से पहले फाइलों की चाल धीमी पड़ जाती है। इस पर सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बालोद के कामों का हवाला देते हुए पूछा कि पीडब्ल्यूडी से फाइल मंगवाकर ही स्वीकृति दी जाएगी क्या—यह सवाल (PWD Fund Clearance) पर बहस को और तेज कर गया।
प्रक्रिया बनाम प्राथमिकता की बहस
मंत्री ने दोहराया कि हर काम की एक तय प्रक्रिया होती है और प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृतियां दी जाती हैं। विपक्ष का तर्क था कि बजट में प्रावधान होने के बावजूद मैदानी अमल में देर हो रही है। सरकार ने इसे “प्रक्रियागत समय” बताया, जबकि विपक्ष ने “जमीनी देरी” कहकर घेरा।
जवाबों से असंतोष, विपक्ष का वॉकआउट
बहस के बीच जवाबों से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। कार्यवाही कुछ देर के लिए बाधित रही, बाद में सदन की कार्रवाई सामान्य हुई। सत्ता पक्ष ने कहा कि सभी स्वीकृतियां नियमानुसार दी जा रही हैं और जल्द ही लंबित कार्यों का धरातल पर असर दिखेगा।






