सीजी भास्कर, 14 मार्च। छत्तीसगढ़ में गैस सिलेंडर को लेकर बनी अफरातफरी के बीच उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने लोगों से शांति और धैर्य बनाए रखने (Arun Sao LPG Statement) की अपील की है। उन्होंने कहा कि एजेंसियों के बाहर दिखाई दे रही लंबी कतारों और अचानक बढ़ी मांग के पीछे वैश्विक हालात के साथ-साथ अफवाहों की भी बड़ी भूमिका है।
सरकार का कहना है कि पेट्रोल और गैस की सप्लाई पूरी तरह खत्म होने जैसी स्थिति नहीं है, इसलिए लोगों को घबराकर फैसले लेने की जरूरत नहीं है। उपमुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि अफवाहें हालात को और खराब करती हैं, इसलिए आम लोगों को सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
कालाबाजारी रोकने के लिए सख्ती, सरकार ने दिए स्पष्ट संकेत
अरुण साव ने यह भी कहा कि गैस सिलेंडर की किल्लत का फायदा उठाने वाले लोगों के खिलाफ प्रशासन सख्त (Arun Sao LPG Statement) रुख अपना रहा है। जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि सरकार की पहली प्राथमिकता यह है कि जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक सिलेंडर पहुंचे और किसी भी तरह की कृत्रिम कमी पैदा न होने दी जाए। यही वजह है कि जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को लगातार सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
अफीम की खेती के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा
मीडिया से बातचीत के दौरान डिप्टी सीएम ने अफीम की खेती को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नशे के कारोबार की जो जड़ें दिखाई दे रही हैं, वह पिछली सरकार के समय की देन हैं। उनके मुताबिक, जैसे ही इस तरह की गतिविधियों की सूचना मिली, सरकार ने त्वरित (Arun Sao LPG Statement) कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पूरे राज्य में सर्वे के निर्देश दिए हैं और जहां भी अवैध गतिविधियां सामने आएंगी, वहां कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मुद्दे पर उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश का भी आरोप लगाया।
गौधाम योजना को लेकर सरकार ने पेश किया अपना विजन
उपमुख्यमंत्री ने गौधाम योजना की शुरुआत को भी सरकार की बड़ी पहल बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में 1460 गौधाम विकसित किए जाने हैं, जिनमें शुरुआती चरण में 26 को स्वीकृति मिल चुकी है। सरकार का दावा है कि इन गौधामों में पशुओं के लिए चारा, देखभाल और चरवाहों के मानदेय जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। अरुण साव ने कहा कि यह योजना केवल घोषणा भर नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने वाली पहल होगी और इससे पशुधन संरक्षण को नई दिशा मिलेगी।





