Assam Fake Passport Controversy : असम में कथित तौर पर नकली पासपोर्ट से जुड़े एक मामले ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए आरोपों का कड़ा खंडन करते हुए मुख्यमंत्री ने इन दावों को पूरी तरह निराधार करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके परिवार के विरुद्ध पेश किए गए दस्तावेज असली नहीं हैं, बल्कि उनमें डिजिटल माध्यमों से गंभीर छेड़छाड़ की गई है।
डिजिटल हेरफेर और विदेशी कनेक्शन का दावा
मुख्यमंत्री ने इस पूरे विवाद को तकनीकी साजिश बताते हुए दावा किया कि सोशल मीडिया पर पहले से मौजूद पुरानी तस्वीरों को एडिटिंग के जरिए भ्रामक रूप दिया गया है। उनके अनुसार, यह संदिग्ध सामग्री संभवतः विदेशी सोशल मीडिया स्रोतों से ली गई है और इसे जानबूझकर सार्वजनिक किया गया है। इस पूरे नेटवर्क और सामग्री के मूल स्रोत की गहराई से जांच किए जाने की आवश्यकता जताई गई है।
चुनाव से पहले माहौल बिगाड़ने की कोशिश का आरोप
सत्ता पक्ष का मानना है कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि फर्जी और मनगढ़ंत कागजातों के आधार पर किसी की छवि धूमिल करना एक संगीन जुर्म है। उन्होंने चेतावनी दी है कि गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ कानून की सख्त धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।
पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियों की सक्रियता
इस संवेदनशील मामले में आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज करा दी गई है, जिसके बाद पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। वर्तमान में विभिन्न जांच एजेंसियां उन डिजिटल साक्ष्यों की सत्यता की परख कर रही हैं जिन्हें विवाद का आधार बनाया गया है। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे किन प्रभावशाली लोगों या समूहों का हाथ है।
चुनावी सरगर्मी के बीच जारी है आरोप-प्रत्यारोप का दौर
जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, इस विवाद ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है। दोनों पक्षों की ओर से तीखी बयानबाजी जारी है और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस घटनाक्रम ने राज्य के चुनावी परिदृश्य को पूरी तरह से गरमा दिया है, जिससे जनता के बीच भी इस विषय को लेकर गहन चर्चा छिड़ गई है।


