सीजी भास्कर, 15 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इतिहास में एक और काला अध्याय जुड़ गया है। सक्ती (Vedanta Plant Tragedy) जिले के डभरा ब्लॉक स्थित सिंघीतराई में संचालित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस वेदांता प्लांट हादसा में जान गंवाने वाले मजदूरों की संख्या अब बढ़कर 17 हो गई है। प्रशासन ने लंबी जद्दोजहद के बाद सभी मृतकों की पहचान पूरी कर ली है और उनकी आधिकारिक सूची जारी कर दी है। इस घटना ने न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि उन राज्यों में भी मातम पसरा दिया है, जहां के मजदूर यहां रोजी-रोटी की तलाश में आए थे।
देश के विभिन्न राज्यों के मजदूर हुए शिकार
इस हृदय विदारक घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों में देश के पांच अलग-अलग राज्यों के श्रमिक शामिल हैं। जारी सूची के अनुसार, इस भीषण वेदांता प्लांट हादसा (Vedanta Plant Tragedy) में सबसे अधिक जनहानि पश्चिम बंगाल के मजदूरों की हुई है, जहां के 5 श्रमिकों ने अपनी जान गंवाई है। इसके अलावा झारखंड के 3, बिहार के 2, उत्तर प्रदेश के 2 और छत्तीसगढ़ के स्थानीय क्षेत्रों (सक्ती से 3, जांजगीर-चांपा से 1 और रायगढ़ से 1) के मजदूर इस काल के गाल में समा गए।
प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतकों के परिजनों को सूचित कर दिया है। वर्तमान में शवों का पोस्टमार्टम कर उन्हें उनके गृह राज्यों तक सम्मानपूर्वक भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, जो श्रमिक गंभीर रूप से झुलसे हैं, उनका इलाज रायपुर और रायगढ़ के अत्याधुनिक अस्पतालों में चल रहा है, जहां कई की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
मृतकों की सूची और पहचान
प्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, मृतकों में बिहार के रितेश कुमार (भागलपुर) और आकिब खान (दरभंगा) शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के स्थानीय मृतकों में अमृत लाल पटेल (डभरा), ठंडाराम लहरे (मालखरौदा), उधब सिंह यादव (रायगढ़), रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर-चांपा) और नदीम अंसारी (सक्ती) के नाम हैं। झारखंड से तरुण कुमार ओझा, अब्दुल करीम और अशोक परहिया ने अपनी जान गंवाई है। पश्चिम बंगाल के मृतकों में सुसंता जना, शेख सैफुद्दीन, मानस गिरी, कार्तिक महतो और शिबनाथ मुर्मू शामिल हैं। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से पप्पू कुमार और बृजेश कुमार इस वेदांता प्लांट हादसा (Vedanta Plant Tragedy) का शिकार बने हैं।
सुरक्षा मानकों पर गहराते सवाल
इतने बड़े पैमाने पर हुई इस जनहानि ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुरक्षा ऑडिट और मशीनों का रख-रखाव सही समय पर होता, तो इस भयावह वेदांता प्लांट हादसा (Vedanta Plant Tragedy) को रोका जा सकता था। मजदूरों के संगठनों ने आरोप लगाया है कि उत्पादन के लक्ष्य को पूरा करने के चक्कर में अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है, जिसका खामियाजा गरीब मजदूरों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है।
घटना के बाद पूरे सक्ती जिले में तनाव और दुख का माहौल है। प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस तकनीकी खराबी के पीछे असली जिम्मेदारी किसकी है। क्या यह महज एक दुर्घटना थी या आपराधिक लापरवाही, इसका जवाब भविष्य की जांच रिपोर्ट में ही मिल पाएगा। लेकिन फिलहाल, 17 घरों के बुझ चुके चिरागों ने इस विकास की चमक पर एक गहरा सवालिया निशान लगा दिया है। इस वेदांता प्लांट हादसा (Vedanta Plant Tragedy) की गूँज लंबे समय तक औद्योगिक गलियारों में सुनाई देगी।


