सीजी भास्कर, 15 अप्रैल : स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मचारी (Staff Attachment System) अपनी मूल पदस्थापना को छोड़ “अटैचमेंट” की मलाई काट रहे हैं। शासन और प्रशासन की सख्त हिदायत के बावजूद, यह स्टाफ अटैचमेंट प्रथा खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। ताज़ा मामले में खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) ने कड़ा रुख अपनाते हुए आठ कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है, जो वर्षों से रसूखदार अधिकारियों की ‘कृपा’ के चलते अपनी मूल जगहों से नदारद हैं।
मंत्री के आदेश की भी अवहेलना
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संलग्नीकरण (अटैचमेंट) प्रथा को समाप्त करने की स्पष्ट घोषणा की जा चुकी है। इसके बावजूद, बकावंड में स्थिति जस की तस बनी हुई है। अधिकारियों और कर्मचारियों की आपसी जुगलबंदी के कारण यह स्टाफ अटैचमेंट प्रथा (Staff Attachment System) स्वास्थ्य सुविधाओं के उचित संचालन में बड़ी बाधा बन रही है। बताया जा रहा है कि कई कर्मचारी ऊपर बैठे बड़े अफसरों के संरक्षण में स्थानीय अधिकारियों के आदेशों को भी ठेंगे पर रख रहे हैं।
इन आठ कर्मचारियों को जारी हुआ नोटिस
बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के बीएमओ डॉ. हरीश मरकाम ने शासन के निर्देशों का पालन करते हुए अब सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने आठ ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित कर नोटिस जारी किया है जो लंबे समय से अन्यत्र संलग्न हैं। इन कर्मचारियों में स्टाफ नर्स सुमन निषाद, स्वीपर गीता सोनी, स्टाफ नर्स सृष्टि सारथी, आरएचओ साजन मैथ्यू, आरएचओ पंकज सेठिया, स्टाफ नर्स ऋतु साजन, आरएचओ शशिकला सिंह और आरएचओ शशि शर्मा के नाम शामिल हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि यह स्टाफ अटैचमेंट प्रथा (Staff Attachment System) अब तुरंत खत्म होनी चाहिए और उन्हें अपनी मूल पदस्थापना वाली जगह पर आमद देनी होगी।
मूल पदस्थापना पर नहीं लौटे तो रुकेगा वेतन
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) जगदलपुर के आदेशों का हवाला देते हुए बीएमओ ने स्पष्ट चेतावनी दी है। आदेश के अनुसार, जिले में सभी चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों का संलग्नीकरण समाप्त कर दिया गया है। इसके बावजूद, इन कर्मचारियों ने अब तक अपनी मूल संस्था में जॉइनिंग नहीं दी है। बीएमओ ने निर्देश दिया है कि यदि संबंधित कर्मचारी तत्काल उपस्थित नहीं होते हैं, तो यह स्टाफ अटैचमेंट प्रथा (Staff Attachment System) को अवैध मानते हुए उनका वेतन रोकने की कार्रवाई की जाएगी।
व्यवस्था में बाधा डाल रहे रसूखदार
क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि ये कर्मचारी वर्षों से एक ही जगह जमे हुए हैं, जिससे ग्रामीण अंचलों की स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं। स्थानीय अधिकारी भी इन पर कार्रवाई करने से कतराते थे क्योंकि इन्हें उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, अब वेतन रोकने की चेतावनी से विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार यह स्टाफ अटैचमेंट प्रथा (Staff Attachment System) वास्तव में समाप्त होती है या रसूखदार कर्मचारी एक बार फिर नियमों को दरकिनार करने में सफल रहते हैं।



