सीजी भास्कर, 22 मई। सूरजपुर जिले के प्रसिद्ध कुदरगढ़ देवी धाम में शुक्रवार को अचानक भीषण आग लगने से मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि श्रद्धालुओं और पुजारियों में हड़कंप मच गया। घटना के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में भक्त मौजूद थे। (A massive fire caused trouble at Kudargarh Devi Dham.)
अगरबत्ती से भड़की आग : A massive fire caused trouble at Kudargarh Devi Dham.
जानकारी के मुताबिक मंदिर परिसर में नारियल फोड़ने वाले स्थान के पास श्रद्धालु अगरबत्ती जलाते हैं। शुक्रवार को भी रोज की तरह बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां भगवती पार्वती के दर्शन के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान जलती अगरबत्तियों से अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और आसपास के हिस्सों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया।
ज्योति कलश भवन तक पहुंची लपटें
आग की लपटें तेजी से फैलते हुए ज्योति कलश भवन तक पहुंच गईं। मंदिर परिसर में धुआं और आग फैलने से मौके पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन ने मिलकर आग बुझाने का प्रयास किया। हालांकि समय रहते स्थिति संभाल ली गई, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
अग्निशमन व्यवस्था नहीं होने पर सवाल :
घटना के बाद मंदिर परिसर में अग्निशमन यंत्र नहीं होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि इतने बड़े और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल में आग से निपटने के पर्याप्त इंतजाम मौजूद नहीं थे। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
400 साल पुरानी है कुदरगढ़ धाम की मान्यता
कुदरगढ़ देवी धाम को लेकर गहरी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि यह स्थान मां भगवती पार्वती की तपस्थली रहा है, जहां माता ने शक्ति का रूप धारण कर राक्षसों का संहार किया था। बताया जाता है कि करीब 400 वर्ष पहले राजा बालंद ने यहां माता बागेश्वरी की स्थापना की थी।
चौहान वंश आज भी निभा रहा परंपरा : A massive fire caused trouble at Kudargarh Devi Dham.
इतिहास के अनुसार चौहान वंश के राजा ने राजा बालंद को युद्ध में पराजित किया था। इसके बाद से मंदिर की देखरेख चौहान वंश द्वारा की जाती रही। आज भी हर वर्ष नवरात्रि में सुबह की पहली आरती चौहान वंश के वंशजों द्वारा ही की जाती है।



