सीजी भास्कर, 28 जुलाई : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में खेती को आधुनिक बनाने की दिशा में कृषि विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। ड्रोन तकनीक (Agriculture Drone Technology) के जरिए किसानों के खेतों में कृषि दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है। मंगलवार को प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति दोनर (पैक्स) के ड्रोन से ग्राम ढीमरटिकुर के किसान हरनारायण साहू के खेत में सफल प्रदर्शन किया गया।
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ड्रोन से किया गया दवाइयों का छिड़काव
कृषि विभाग के अनुसार, दोनर समिति के कृषि ड्रोन (Agriculture Drone Technology) से किसान हरनारायण साहू के खेत में दवाइयों का छिड़काव किया गया। किसान के पास करीब 8 एकड़ कृषि भूमि है।
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तकनीकी कारणों से फिलहाल लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में ही इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid), हेक्साकोनाजोल (Hexaconazole) और जैविक उर्वरक का सफलतापूर्वक स्प्रे किया गया। शेष क्षेत्र में तकनीकी समस्या दूर होने के बाद छिड़काव किया जाएगा।

किसानों ने देखा हाईटेक खेती का प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान आसपास के कई किसानों ने ड्रोन तकनीक (Agriculture Drone Technology) से किए जा रहे स्प्रे को देखा। कृषि विशेषज्ञों ने उन्हें ड्रोन की कार्यप्रणाली, संचालन और इसके लाभों की विस्तार से जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन की मदद से कम समय में बड़े क्षेत्र में समान रूप से दवा का छिड़काव किया जा सकता है।
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समय और लागत दोनों की होगी बचत
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, ड्रोन तकनीक (Agriculture Drone Technology) अपनाने से किसानों का समय और श्रम दोनों बचेंगे। दवा की मात्रा नियंत्रित रहेगी और पूरे खेत में समान रूप से छिड़काव होगा।
इसके अलावा किसानों का रासायनिक दवाइयों के सीधे संपर्क में आना भी कम होगा, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम घटेंगे और फसल की गुणवत्ता बेहतर होगी।
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किसानों ने की नियमित सुविधा की मांग
कार्यक्रम में शामिल किसानों ने ड्रोन आधारित खेती (Agriculture Drone Technology) की सराहना की। उनका कहना है कि यदि यह सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाए तो खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी कई किसानों ने खरीफ और रबी सीजन में भी ड्रोन सेवा का लाभ लेने की इच्छा जताई।
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खेती को तकनीक से जोड़ने पर जोर
कृषि विभाग ने बताया कि जिले की सहकारी समितियों के माध्यम से कृषि ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विभाग का उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, लागत कम करना और खेती को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाना है।
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