सीजी भास्कर, 22 जून : छत्तीसगढ़ की दुर्ग पुलिस ने आनलाइन जुआ-सट्टा (Anna Reddy Betting App) और ‘म्यूल अकाउंट’ (फर्जी बैंक खातों) के एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस काले कारोबार में शामिल तीन शातिर सटोरियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। पुलिस की शुरुआती तफ्तीश और पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये आरोपी समाज के बेहद गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर उन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन सट्टे की करोड़ों रुपए की अवैध रकम को खपाने और हेर-फेर करने के लिए करते थे।
- खुर्सीपार के खेल मैदान के पास चल रहा था सट्टा
- 81 नग विभिन्न बैंकों के एटीएम (ATM) कार्ड
- 62 नग बैंक पासबुक और 5 चेकबुक
- 13 चालू मोबाइल फोन और 11 एक्टिवेटेड सिम कार्ड
- 1 हाईटेक लैपटॉप और डेटा से भरी हार्ड डिस्क
- पुलिस ने इस मामले में जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें अजय मिश्रा (उम्र 23 वर्ष, निवासी सेक्टर-1 भिलाई), दीपक कुमार (उम्र 32 वर्ष, निवासी ग्राम नगदोई, जिला नालंदा, बिहार) और करण कुमार सिंह (उम्र 26 वर्ष, निवासी बालाजी नगर, खुर्सीपार, भिलाई) शामिल हैं।
- कैसे काम करता था यह ‘म्यूल अकाउंट’ स्कैम
खुर्सीपार के खेल मैदान के पास चल रहा था सट्टा
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मणिशंकर चंद्रा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस को 21 जून को मुखबिर से एक पुख्ता सूचना मिली थी। सूचना में बताया गया था कि खुर्सीपार स्थित आईटीआई खेल मैदान के पास कुछ युवक लैपटॉप और मोबाइल फोन की मदद से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन सट्टे (Anna Reddy Betting App) की लाइन चला रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस की एक विशेष टीम ने बताए गए स्थान पर दबिश दी और घेराबंदी करके तीन संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया।
कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे “अन्ना रेड्डी” ऑनलाइन बेटिंग ऐप के माध्यम से सट्टे का पूरा सिंडिकेट संचालित कर रहे थे। जांच में यह भी पता चला है कि हाल ही में बीते आईपीएल (IPL) सीजन के दौरान इस पूरे रैकेट को रांची (झारखंड) में बैठकर ऑपरेट किया जा रहा था।
डिजिटल हथियारों का जखीरा बरामद
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से पुलिस ने जो सामान बरामद किया है, उसे देखकर खुद अधिकारी भी हैरान रह गए। छापेमारी के दौरान सटोरियों के कब्जे से-
81 नग विभिन्न बैंकों के एटीएम (ATM) कार्ड
62 नग बैंक पासबुक और 5 चेकबुक
13 चालू मोबाइल फोन और 11 एक्टिवेटेड सिम कार्ड
1 हाईटेक लैपटॉप और डेटा से भरी हार्ड डिस्क
पुलिस ने इस मामले में जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें अजय मिश्रा (उम्र 23 वर्ष, निवासी सेक्टर-1 भिलाई), दीपक कुमार (उम्र 32 वर्ष, निवासी ग्राम नगदोई, जिला नालंदा, बिहार) और करण कुमार सिंह (उम्र 26 वर्ष, निवासी बालाजी नगर, खुर्सीपार, भिलाई) शामिल हैं।
कैसे काम करता था यह ‘म्यूल अकाउंट’ स्कैम
पुलिस की तकनीकी जांच में सामने आया कि इन आरोपियों का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। ये भिलाई और आसपास के इलाकों के गरीब व मजदूर वर्ग के लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें कुछ रुपयों की तत्काल आर्थिक मदद या कमीशन का लालच देकर बैंकों में ले जाते थे और उनके नाम पर खाते खुलवा देते थे। खाता खुलते ही आरोपी उनके एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक और बैंक खाते से लिंक मोबाइल सिम कार्ड को अपने कब्जे में ले लेते थे।
इसके बाद, सट्टे की जीत-हार की जो भी रकम आती थी, उसे इन खातों में मंगाया जाता था और डिजिटल तरीके से या एटीएम के जरिए निकाल लिया जाता था, ताकि मुख्य सटोरियों तक पुलिस कभी न पहुंच सके। दुर्ग पुलिस ने बताया कि जब्त किए गए सभी डिजिटल उपकरणों और बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस को पुख्ता आशंका है कि इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के तार कई बड़े सफेदपोशों से भी जुड़े हुए हैं, जिनकी सरगर्मी से पतासाजी की जा रही है।





