सीजी भास्कर, मुंबई, 29 अक्टूबर। महाराष्ट्र विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों (BJP Vs Shiv Sena) के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में अंदरूनी खींचतान की चर्चा तेज हो गई है। पांच सीटों में से महायुति को दो सीटों पर जीत मिली, जबकि महाविकास आघाड़ी ने तीन सीटें अपने नाम कीं। इसके बाद बीजेपी ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पर गठबंधन के उम्मीदवारों को अपेक्षित सहयोग नहीं देने का आरोप लगाया है। बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन का दावा है कि सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल होता तो गठबंधन का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता था। हालांकि, शिवसेना की भूमिका को लेकर लगाए गए ये आरोप बीजेपी नेता के बयान पर आधारित हैं।
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बीजेपी ने शिवसेना पर उठाए सवाल
बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि पुणे और नागपुर में शिवसेना ने महायुति के उम्मीदवारों को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया। उनके मुताबिक, पुणे में शिवसेना ने आखिरी समय में निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को समर्थन दिया, जिससे गठबंधन के भीतर तालमेल प्रभावित हुआ।
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बन ने दावा किया कि सानप को मिले वोट बीजेपी के उम्मीदवार के पक्ष में नहीं आए। उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सत्तार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के खिलाफ प्रचार किया। बीजेपी नेता के अनुसार, सहयोगी दलों की अलग-अलग रणनीतियों का असर चुनावी नतीजों पर पड़ा। महाराष्ट्र की राजनीति में BJP Vs Shiv Sena की यह खींचतान अब गठबंधन के आपसी तालमेल को लेकर सवाल खड़े कर रही है। हालांकि, इन आरोपों पर शिवसेना के पक्ष की प्रतिक्रिया के बिना इसे किसी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
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पुणे स्नातक सीट पर बीजेपी हारी
पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव ने जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी की उम्मीदवार डॉ. स्मिता जाधव को हराया। इस नतीजे से बीजेपी को झटका लगा, जबकि शरद पवार गुट को महत्वपूर्ण सफलता मिली।
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इस चुनाव में हर्षदा देशमुख-जाधव की जीत ने पुणे स्नातक सीट पर राजनीतिक मुकाबले को चर्चा में ला दिया। बीजेपी की ओर से गठबंधन के भीतर सहयोग को लेकर उठाए गए सवालों के बीच यह नतीजा पार्टी के लिए समीक्षा का विषय बन गया है।
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मराठवाड़ा में शरद पवार गुट जीता
छत्रपति संभाजीनगर यानी मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार डॉ. प्रतापसिंह पाटील ने जीत हासिल की। उन्होंने महायुति समर्थित उम्मीदवार सतीश चव्हाण को हराया। इस सीट पर नतीजे ने महायुति की चुनावी रणनीति को लेकर बहस को और तेज किया।
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मराठवाड़ा में मिली हार के बाद बीजेपी प्रवक्ता नवनाथ बन ने शिवसेना नेता अब्दुल सत्तार की भूमिका पर सवाल उठाए। हालांकि, उनके आरोपों और चुनावी परिणाम के बीच सीधे संबंध की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में इस मामले में दोनों पक्षों के बयानों को ध्यान में रखना जरूरी है।
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पुणे शिक्षक सीट पर बीजेपी की जीत
पुणे विभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी के कौस्तुभ गावडे ने जीत दर्ज की। उन्हें कुल 23,117 वोट मिले, जबकि शिवसेना समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार प्रोफेसर सचिन सानप को 16,347 वोट प्राप्त हुए। पूर्व विधायक दत्तात्रय सावंत 12,687 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस के मौजूदा विधायक प्रोफेसर जयंत आसगांवकर को 8,965 वोट मिले।
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इस सीट पर बीजेपी की जीत से पार्टी को राहत मिली। हालांकि, पांच निर्वाचन क्षेत्रों के कुल नतीजों में महायुति केवल दो सीटें ही जीत सकी। पुणे शिक्षक सीट पर बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना समर्थित उम्मीदवार के बीच मुकाबले ने गठबंधन के भीतर सीटों और समर्थन को लेकर मतभेदों की चर्चा को भी हवा दी।
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नागपुर में कांग्रेस ने मारी बाजी
नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहले को हराकर जीत हासिल की। मतगणना के शुरुआती चरणों में बीजेपी उम्मीदवार पहली वरीयता के वोटों में आगे थे, लेकिन बाद के दौर में कांग्रेस उम्मीदवार ने बढ़त बनाकर जीत दर्ज की।
नागपुर की हार भी बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण रही। नतीजों के बाद BJP Vs Shiv Sena विवाद में गठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, नागपुर के परिणाम के लिए शिवसेना को जिम्मेदार ठहराने वाला दावा बीजेपी प्रवक्ता का आरोप है; इसे स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
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अमरावती में शिंदे गुट की जीत
अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किरण सरनाईक ने कांग्रेस की प्रोफेसर अदिति पोहरे को हराया। सरनाईक ने अंतिम दौर में जीत के लिए जरूरी 16,134 वोटों का कोटा पार करते हुए 16,663 वोट हासिल किए। अदिति पोहरे को 7,498 वोट मिले, जबकि शिवसेना के बागी श्रीकांत देशपांडे को 7,017 वोट प्राप्त हुए। इस चुनाव में कुल 26 उम्मीदवार मैदान में थे और मतगणना करीब 36 घंटे तक चली। अमरावती में शिंदे गुट की जीत दिखाती है कि महायुति के भीतर शिवसेना को भी एक सीट पर सफलता मिली। वहीं, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्षी दलों की जीत ने गठबंधन के समग्र प्रदर्शन पर सवाल खड़े किए हैं।
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महायुति में बढ़ेगी अंदरूनी खींचतान
पांच सीटों में से तीन पर हार और दो पर जीत के बाद महाराष्ट्र में महायुति के चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की चर्चा शुरू हो गई है। बीजेपी नेता नवनाथ बन ने सहयोगी शिवसेना पर अपेक्षित समर्थन नहीं देने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, इन आरोपों को लेकर शिवसेना का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
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फिलहाल BJP Vs Shiv Sena विवाद का केंद्र गठबंधन के भीतर चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों को समर्थन और आपसी तालमेल का मुद्दा है। क्या यह विवाद आगे चलकर महायुति की राजनीति पर असर डालेगा, यह आने वाले दिनों में दोनों दलों की प्रतिक्रिया और उनके बीच होने वाली बातचीत से स्पष्ट हो सकेगा।
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