सीजी भास्कर, 20 मई। दुर्ग जिले में इस बार 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल (Board Result) बढ़ गई है। कमजोर नतीजों को लेकर स्कूलों के भीतर भी चर्चा तेज हो गई है। कई स्कूलों में प्राचार्य और शिक्षक लगातार बैठकों में जुटे नजर आए। अभिभावकों के बीच भी यह सवाल उठने लगा कि आखिर इस बार परिणाम इतने कमजोर क्यों रहे।
बोर्ड रिजल्ट जारी होने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राचार्यों की बैठक लेकर पूरे सत्र की स्थिति पर जानकारी ली। इसके बाद कमजोर परिणाम वाले स्कूलों के प्राचार्यों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
नई पोस्टिंग का पड़ा असर (Board Result)
प्राचार्यों की ओर से दिए गए जवाब में बताया गया कि कई स्कूलों में नई पोस्टिंग ऐसे समय हुई जब परीक्षा का माहौल चल रहा था। इस कारण पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों पर पूरा ध्यान नहीं दिया जा सका। प्राचार्यों का कहना है कि बदलाव की प्रक्रिया के चलते विद्यार्थियों की तैयारी प्रभावित हुई और इसका असर परीक्षा परिणाम पर दिखाई दिया।
194 व्याख्याताओं को मिला प्रमोशन
जानकारी के अनुसार जिले में 194 व्याख्याताओं को प्राचार्य पद पर पदोन्नति दी गई थी। इनमें से केवल 8 व्याख्याता ही स्कूलों से बाहर गए जबकि बाकी स्कूलों में ही सेवाएं दे रहे थे। हालांकि नवंबर में प्रमोशन हुआ लेकिन सितंबर से ही कई व्याख्याता नई जिम्मेदारी को लेकर मानसिक रूप से तैयार होने लगे थे। इससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई है।
युक्तियुक्तकरण से भी बिगड़ी व्यवस्था
शिक्षा विभाग के मुताबिक करीब 56 व्याख्याता युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से प्रभावित हुए। इस तरह लगभग 250 व्याख्याता स्कूलों से अलग हो गए जिससे कई स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित (Board Result) हुई। कई जगह विषयवार शिक्षकों की कमी महसूस की गई और इसका असर सीधे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ा।
पूरा सत्र प्रशासनिक कामों में बीता
पिछले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से ही स्कूलों और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया चलती रही। विभागीय अधिकारी और शिक्षक लंबे समय तक प्रशासनिक कामों में व्यस्त (Board Result) रहे। इसके अलावा प्रशिक्षण कार्यक्रम और दूसरे गैर शैक्षणिक कार्य भी लगातार चलते रहे, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हुआ और बोर्ड परिणाम पर असर देखने को मिला।



