सीजी भास्कर, 11 सितंबर : राजधानी दिल्ली में होने जा रहे ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit 2026) में दुनिया के बड़े नेताओं और उनके प्रतिनिधियों के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी इस बार भारत कर रहा है। बैठक के मुख्य कार्यक्रम भारत मंडपम में होंगे, जबकि विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले प्रमुख होटलों में भी उनके स्वागत और खान-पान के लिए खास इंतजाम किए गए हैं।
इस बार मेहमानों को सिर्फ आलीशान सुविधाएं ही नहीं, बल्कि भारत की विविध खान-पान परंपरा का स्वाद भी चखने को मिलेगा। कश्मीर के अखरोट से लेकर राजस्थान की कचौरी, तमिलनाडु के मुरुक्कू, लखनऊ के गलौटी कबाब और बिहार के सत्तू-मखाने तक, मेन्यू में देश के अलग-अलग हिस्सों के खास स्वाद को शामिल करने की तैयारी है।
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हर राज्य के स्वाद की झलक
नई दिल्ली के ताज महल होटल में ब्रिक्स मेहमानों (BRICS Summit 2026) के लिए खास स्नैक्स तैयार किए जा रहे हैं। इसे ‘Tradition To Table’ नाम दिया गया है। इस खास मेन्यू में कश्मीर के मसालेदार अखरोट, पुरानी दिल्ली का मैदा काजू, महाराष्ट्र की भाकरवाड़ी, राजस्थान की छोटी कचौरी और बंगाल की कुचो निमकी जैसे पारंपरिक स्वाद शामिल किए गए हैं।
इसके अलावा तमिलनाडु का मुरुक्कू और गलौटी कबाब भी मेहमानों को परोसे जाने वाले खास व्यंजनों का हिस्सा हैं। इसका उद्देश्य भारत के अलग-अलग राज्यों की खान-पान परंपराओं और क्षेत्रीय स्वादों को एक ही मेन्यू के जरिए विदेशी मेहमानों तक पहुंचाना है।
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शेफ की मां की रेसिपी भी शामिल
खास बात यह है कि मेन्यू (BRICS Summit 2026) में केवल देश के लोकप्रिय व्यंजनों को ही जगह नहीं मिली है। इसमें होटल के शेफ की व्यक्तिगत यादों और बचपन के स्वाद को भी शामिल किया गया है। कुछ व्यंजनों की रेसिपी शेफ को अपनी मां से मिली है, इसलिए इनमें पारंपरिक घरेलू स्वाद की झलक भी देखने को मिलेगी।
इस तरह तैयार किया गया मेन्यू सिर्फ खाने की सूची नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और घरेलू स्वाद को विदेशी मेहमानों के सामने पेश करने का माध्यम भी होगा। हर व्यंजन के जरिए देश के किसी न किसी हिस्से की पहचान को सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
बिहार के सत्तू-मखाने पर नजर
ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit 2026) में बिहार के दो खास उत्पाद सत्तू और मखाना भी विदेशी मेहमानों तक पहुंचाए जाएंगे। लंबे समय से बिहार के खान-पान का हिस्सा रहा सत्तू अब देश के बाहर भी अपनी पहचान बना रहा है। वहीं, मखाना भी बिहार के प्रमुख स्थानीय उत्पादों में शामिल है।
विदेशी मेहमानों और मीडिया के लिए तैयार की जा रही किट में सत्तू और मखाने को शामिल किया जाएगा। इससे बिहार के इन स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के बीच पहचान दिलाने और उनके संभावित बाजार को बढ़ाने का अवसर मिल सकता है।
कैसे तय होता है मेहमानों का मेन्यू
इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए मेन्यू तैयार करना आसान नहीं होता। ब्रिक्स मेहमानों (BRICS Summit 2026) के लिए खाना तय करते समय सरकार, होटल प्रबंधन, आयोजन टीम और प्रोटोकॉल से जुड़े अधिकारियों के बीच समन्वय किया जाता है। सबसे पहले यह तय किया जाता है कि खाने के जरिए भारत की कौन-कौन सी खासियत विदेशी मेहमानों के सामने रखी जाए।
इसके बाद हर मेहमान की व्यक्तिगत जरूरतों का ध्यान रखा जाता है। किसे शाकाहारी भोजन चाहिए, किसे मांसाहारी, किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी तो नहीं है, किसी विशेष डाइट की जरूरत है या धार्मिक कारणों से किसी भोजन से परहेज करना है—इन सभी जानकारियों को पहले से जुटाया जाता है। इन्हीं जरूरतों और भारत के क्षेत्रीय स्वादों को ध्यान में रखकर अंतिम मेन्यू तैयार किया जाता है।
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दुनिया तक पहुंचेगा भारत का स्वाद
भारत के लिए ब्रिक्स सम्मेलन केवल कूटनीतिक और आर्थिक चर्चा का मंच नहीं है। यह देश की संस्कृति, परंपरा और खान-पान की विविधता को दुनिया के सामने पेश करने का भी बड़ा अवसर है। इस बार भोजन के जरिए कश्मीर से तमिलनाडु और राजस्थान से बिहार तक अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान विदेशी मेहमानों तक पहुंचाने की तैयारी है।
गलौटी कबाब, भाकरवाड़ी और कचौरी जैसे पारंपरिक व्यंजनों से लेकर सत्तू और मखाने जैसे स्थानीय उत्पादों तक, इस मेन्यू में भारत की विविधता दिखाई देगी। यानी ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit 2026) में कूटनीति के साथ-साथ मेहमानों की थाली भी भारत की ‘विविधता में एकता’ की कहानी सुनाएगी।
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