सीजी भास्कर, 11 सितंबर : अब जमीन की पहचान भी डिजिटल तरीके से (Land Aadhaar DILRMP 3.0) तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (DILRMP) के तीसरे चरण की गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके तहत जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, नक्शे, रजिस्ट्रेशन और अन्य जानकारियों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने के साथ हर जमीन को एक यूनिक पहचान नंबर देने की योजना है।

इस योजना के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की जमीनों का रिकॉर्ड आधुनिक डिजिटल व्यवस्था में लाया जाएगा। DILRMP 3.0 के लिए वर्ष 2026 से 2031 के दौरान 565.5 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। सरकार का उद्देश्य जमीन से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड और सेवाओं को एक ऐसे डिजिटल फ्रेमवर्क में जोड़ना है, जहां GIS तकनीक के जरिए जानकारी को आसानी से देखा और इस्तेमाल किया जा सके।
जमीन को मिलेगा यूनिक नंबर
DILRMP 3.0 के तहत देश की जमीनों को 14 अंकों का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर देने की योजना है। इसी वजह से इसे आम बोलचाल में जमीन का आधार (Land Aadhaar DILRMP 3.0) कहा जा रहा है। यह नंबर किसी व्यक्ति का आधार कार्ड नहीं होगा, बल्कि जमीन या संपत्ति की विशिष्ट पहचान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि जमीन की स्पष्ट डिजिटल पहचान होने से संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और धोखाधड़ी की संभावनाओं को कम करने में मदद मिलेगी। जमीन की पहचान, स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड और दूसरे संबंधित दस्तावेजों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने पर पुरानी जानकारी की जांच भी आसान हो सकती है।
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GIS से जुड़ेगा पूरा लैंड रिकॉर्ड
DILRMP 3.0 में GIS आधारित ‘लैंड स्टैक’ तैयार करने की व्यवस्था की गई है। इसमें जियो-रेफरेंस्ड कैडस्ट्रल मैप, अधिकारों का रिकॉर्ड, संपत्ति पंजीकरण और जमीन से जुड़े अदालती मामलों जैसी अलग-अलग जानकारियों को एक डिजिटल फ्रेमवर्क में जोड़ा जाएगा।
राज्यों को API के माध्यम से अलग-अलग भूमि डेटासेट और सिस्टम को एक साथ जोड़कर अपना राज्य स्तरीय लैंड स्टैक विकसित करने की सुविधा मिलेगी। ये स्टैक आगे चलकर राष्ट्रीय लैंड स्टैक का आधार बनेंगे। इससे संबंधित विभागों के बीच जमीन से जुड़ी जानकारी साझा करने और अलग-अलग सिस्टम के साथ काम करने में आसानी होगी।
75 रजिस्ट्रार ऑफिस होंगे आधुनिक
योजना के तहत अधिक भीड़ वाले 75 सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों को पासपोर्ट सेवा केंद्र की तर्ज पर आधुनिक सर्विस सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां डिजिटल सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी, जिससे जमीन और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन से जुड़े काम को ज्यादा व्यवस्थित बनाया जा सके।
इसके साथ ही जमीन और संपत्ति के पुराने रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड को स्कैन करके डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने की योजना है। सरकार के अनुसार इससे पुश्तैनी जमीन, विरासत के अधिकार और पुराने संपत्ति विवादों से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
रजिस्ट्रेशन रिपॉजिटरी से जांच आसान
DILRMP 3.0 के तहत रजिस्ट्रेशन रिपॉजिटरी विकसित की जाएगी। इसमें रजिस्टर्ड दस्तावेजों के साथ संपत्ति पर मौजूद देनदारियों और ऋण से जुड़ी जानकारी को सुरक्षित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।
इससे जमीन खरीदने से पहले उसके स्वामित्व, पुराने खरीद-बिक्री इतिहास और संपत्ति से जुड़ी जरूरी जानकारियों की जांच आसान हो सकती है। डिजिटल रिकॉर्ड (Land Aadhaar DILRMP 3.0) की यह व्यवस्था जमीन से जुड़े लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पेपरलेस होंगे राजस्व कोर्ट
योजना में राजस्व न्यायालय मामला प्रबंधन प्रणाली (RCCMS) को भी आधुनिक बनाने का प्रावधान है। इसे सीधे भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा, जिससे लंबित मामलों की निगरानी और म्यूटेशन से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा शहरी क्षेत्रों के लिए NAKSHA पायलट प्रोजेक्ट को भी आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत सटीक GIS आधारित शहरी भूमि रिकॉर्ड तैयार किए जाएंगे और अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड यानी UrPro कार्ड जारी करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
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किसानों को मिल सकता है बड़ा फायदा
केंद्रीय ग्रामीण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार यह पहल केवल व्यक्तिगत भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक यूनिफाइड लैंड मैनेजमेंट सिस्टम की दिशा में आगे बढ़ेगी। उनका कहना है कि इससे किसानों को संस्थागत ऋण प्राप्त करने में मदद मिल सकती है और जमीन से जुड़े काम के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।
आने वाले समय में जमीन के रिकॉर्ड, नक्शे, रजिस्ट्रेशन और न्यायालय से जुड़े मामलों को एक डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने से भूमि विवाद, रिकॉर्ड की जांच और संपत्ति लेन-देन से जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, योजना के अलग-अलग प्रावधानों का वास्तविक लाभ राज्यों में इनके लागू होने और डिजिटल रिकॉर्ड की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
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