सीजी भास्कर, 03 सितंबर : करेले की खेती (Bitter Gourd Farming) ने एक किसान की आमदनी बढ़ाने के साथ खेती को लेकर उनका नजरिया भी बदल दिया। पहले पारंपरिक तरीके से खेती करने वाले किसान ने जब नई तकनीक अपनाई तो उत्पादन के साथ मुनाफे में भी बड़ा फर्क नजर आया। अब उनकी सफलता गांव के दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन रही है।
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पारंपरिक खेती में नहीं मिल रहा था अपेक्षित लाभ
कोरबा जिले के पोड़ीउपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नगोई बछेरा निवासी पुष्पेन्द्र कुमार लंबे समय से खेती कर रहे हैं। पहले वे अपने खेत में पारंपरिक तरीके से सब्जियों का उत्पादन करते थे। इसमें मेहनत काफी होती थी, लेकिन उत्पादन और आमदनी अपेक्षा के मुताबिक नहीं हो पाती थी। खेती से सीमित आमदनी को देखते हुए उन्होंने नई तकनीक और बेहतर उत्पादन के तरीकों की तलाश शुरू की। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों से मार्गदर्शन मिला।
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आधुनिक तकनीक का सहारा
उद्यानिकी विभाग की जानकारी और मार्गदर्शन के बाद पुष्पेन्द्र कुमार ने करेले की खेती (Bitter Gourd Farming) को आधुनिक तरीके से करने का फैसला लिया। उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन का लाभ उठाया और अपने खेत में नई तकनीक से सब्जी उत्पादन शुरू किया। किसान के पास कुल 4.385 हेक्टेयर भूमि है। इसमें करीब 4 हेक्टेयर सिंचित और 0.385 हेक्टेयर असिंचित जमीन है। योजना के तहत उन्होंने 0.800 हेक्टेयर क्षेत्र में कद्दू वर्गीय फसल करेला की खेती की।
60 क्विंटल करेला का उत्पादन
आधुनिक तकनीक अपनाने का असर उत्पादन पर दिखाई दिया। 0.800 हेक्टेयर क्षेत्र में की गई Bitter Gourd Farming से पुष्पेन्द्र कुमार को करीब 60 क्विंटल करेला उत्पादन प्राप्त हुआ। बेहतर उत्पादन के साथ किसान को आर्थिक फायदा भी हुआ। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस खेती से उन्हें करीब 1.60 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला। अतिरिक्त आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया।
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खेती में बदलाव से बढ़ा आत्मविश्वास
पुष्पेन्द्र कुमार बताते हैं कि पहले वे सामान्य तरीके से खेती करते थे। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन मिलने के बाद उन्होंने आधुनिक पद्धति अपनाई। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से उन्हें नई तकनीक समझने और बेहतर उत्पादन हासिल करने में मदद मिली।अब वे अपने गांव में करेले की खेती (Bitter Gourd Farming) के जरिए अच्छी आमदनी हासिल करने वाले किसान के रूप में पहचान बना रहे हैं।
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दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
पुष्पेन्द्र कुमार की सफलता यह बताती है कि सही तकनीक और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर खेती को ज्यादा लाभदायक बनाया जा सकता है। आधुनिक तकनीक से सब्जी उत्पादन करने का उनका अनुभव गांव के अन्य किसानों को भी नई पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के माध्यम से मिलने वाली सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन ने उन्हें खेती में नया प्रयोग करने का आत्मविश्वास दिया। करेले की खेती (Bitter Gourd Farming) से मिली सफलता अब उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया बन गई है।
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