सीजी भास्कर, 14 जून। बलरामपुर जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाली एक महिला की सफलता आज आसपास के इलाकों में चर्चा (Lakhpati Didi) का विषय बनी हुई है। कुछ साल पहले तक जहां परिवार की आय सीमित थी, वहीं अब मेहनत, प्रशिक्षण और नई तकनीकों की मदद से उन्होंने अपनी पहचान एक सफल महिला किसान के रूप में बना ली है। उनकी कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
गांव की कई महिलाएं अब उनसे सलाह लेने पहुंचती हैं और उनकी सफलता को अपने जीवन में उतारने की कोशिश कर रही हैं। आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर उन्होंने यह साबित कर दिया कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं।
स्व सहायता समूह से मिली नई दिशा : Lakhpati Didi
बलरामपुर जिले के राधाकृष्णनगर की रहने वाली श्रीमती लतिका सिदार के जीवन में बदलाव की शुरुआत तब हुई जब वह राधाकृष्ण स्व सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें सामुदायिक संसाधन व्यक्ति के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। इससे उनका अनुभव बढ़ा और उन्हें नई तकनीकों को सीखने का मौका मिला।
प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास
विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने के दौरान उन्होंने आधुनिक खेती, उद्यमिता और आजीविका से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सीखा। प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी को उन्होंने केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने खेत में लागू कर वास्तविक परिणाम हासिल किए।
आधुनिक तकनीक ने बढ़ाई उपज
श्रीमती लतिका ने अपनी एक एकड़ कृषि भूमि में ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग (Lakhpati Didi) शुरू किया। स्व सहायता समूह से मिले ऋण की मदद से उन्होंने सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाया। इसके बाद मिर्च, बरबट्टी और अन्य बागवानी फसलों का उत्पादन पहले की तुलना में काफी बढ़ गया।
आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा
नई तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत कम हुई और पानी की बचत भी हुई। बेहतर उत्पादन का सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ा। आज कृषि और अन्य आजीविका गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। इससे वह परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों की पढ़ाई और भविष्य के लिए भी निवेश कर पा रही हैं।
अब जैविक खेती का है सपना
श्रीमती लतिका का कहना है कि स्व सहायता समूह ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। अब उनका लक्ष्य अपनी खेती को पूरी तरह जैविक स्वरूप देना है। वह चाहती हैं कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकें और अन्य किसानों को भी इस दिशा में प्रेरित कर सकें।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
लतिका सिदार की सफलता यह दिखाती है कि प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और सही मार्गदर्शन से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत (Lakhpati Didi) बन सकती हैं। आज प्रदेश की हजारों महिलाएं स्व सहायता समूहों के माध्यम से खेती, पशुपालन और छोटे व्यवसायों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। लतिका की उपलब्धि इसी परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।





