सीजी भास्कर, 02 सितंबर। करीब 5 एकड़ जमीन पर कथित अवैध अफीम की खेती के मामले में पूर्व भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जमानत (Durg Opium Cultivation Case) मिल गई है। हालांकि, अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज FIR और आरोप पत्र को रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान माना कि कार्रवाई के समय विनायक ताम्रकार खेत में मौजूद नहीं थे और उनके कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ था।

जमानत के साथ लगाई गईं कई शर्तें Durg Opium Cultivation Case
अदालत ने विनायक ताम्रकार को सशर्त जमानत दी है। उन्हें दुर्ग जिला छोड़ने की अनुमति नहीं होगी और जांच व न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करना होगा।
कोर्ट ने गवाहों को प्रभावित नहीं करने के भी निर्देश दिए हैं। मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस 29 जुलाई को आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।
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5 एकड़ से ज्यादा जमीन पर मिली थी कथित अफीम की खेती
मामला पुलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम समोदा-झेंझरी का है। 6 मार्च को पुलिस को करीब 5 एकड़ कृषि भूमि पर कथित तौर पर अफीम की अवैध खेती की जानकारी मिली थी।
जांच के दौरान खसरा नंबर 309 और 310 की जमीन पर अफीम के पौधे पाए गए थे। पुलिस ने करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में लगे पौधों को जब्त किया था।
पुलिस के अनुसार जब्त पौधों की अनुमानित कीमत करीब 8 करोड़ रुपए बताई गई थी।
939 पन्नों की चार्जशीट, 78 गवाह
पुलिस ने मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जबकि दो आरोपी फरार बताए गए हैं। विनायक ताम्रकार समेत तीन लोगों को मुख्य आरोपी बनाया गया था।
जांच के बाद पुलिस ने 939 पन्नों का आरोप पत्र अदालत में पेश किया, जिसमें 78 गवाहों का उल्लेख किया गया है।
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FIR और चार्जशीट रद्द करने से कोर्ट का इनकार
विनायक ताम्रकार की ओर से FIR और आरोप पत्र रद्द करने के लिए अलग याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि इस स्तर पर साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा करना ट्रायल से पहले ही मामले की सुनवाई पूरी करने जैसा होगा।
जमानत मिलने के बावजूद विनायक ताम्रकार के खिलाफ मामला जारी रहेगा। इस मामले में ट्रायल के दौरान गवाहों के बयान 9 सितंबर से दर्ज किए जाने हैं।
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