सीजी भास्कर, 2 सितंबर : भरण-पोषण मामले में पत्नी की आय और संपत्ति को लेकर पति के सवाल पूछने के अधिकार पर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि पति को पत्नी के आय संबंधी शपथ-पत्र पर सवाल करने का अवसर मिलना चाहिए। हाईकोर्ट ने इस (High Court Maintenance Case) में फैमिली कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें पति के वकील को ऐसे सवाल पूछने से रोक दिया गया था।
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पत्नी ने भरण-पोषण के लिए दाखिल किया था आवेदन
रायपुर की एक महिला ने दुर्ग फैमिली कोर्ट में पति से भरण-पोषण की मांग करते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 के तहत आवेदन दिया था। सुप्रीम कोर्ट के रजनेश बनाम नेहा मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार महिला ने अपनी संपत्ति और आय से संबंधित शपथ-पत्र भी अदालत में पेश किया।
सुनवाई के दौरान पति के वकील ने पत्नी से उसके शपथ-पत्र और आय के स्रोत को लेकर सवाल किए। लेकिन दुर्ग फैमिली कोर्ट के द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने 3 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर इन सवालों पर रोक लगा दी। इसके बाद मामला (High Court Maintenance Case) के रूप में हाईकोर्ट पहुंचा।
पति ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
फैमिली कोर्ट के आदेश को पति ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में तर्क दिया गया कि पत्नी की आय और संपत्ति से जुड़े सवाल पूछने का अवसर नहीं मिलने से उसका पक्ष प्रभावित होगा। याचिकाकर्ता ने इसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के विपरीत बताया।
हाईकोर्ट ने पति की याचिका स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 11 सितंबर को होने वाली सुनवाई में पति को पत्नी के आय संबंधी शपथ-पत्र पर सवाल करने की अनुमति दी जाए। (High Court Maintenance Case) में कोर्ट ने निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को महत्वपूर्ण माना है।
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सवाल दोहराने और समय बर्बाद करने पर रोक
हाईकोर्ट ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि पति की ओर से सवाल दोहराए नहीं जाने चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत का समय अनावश्यक रूप से बर्बाद नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने उसी दिन गवाही पूरी करने का प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। यानी (High Court Maintenance Case) में पति को सवाल पूछने का अधिकार दिया गया है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल सुनवाई को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने के लिए नहीं किया जा सकता।
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पत्नी को भी पति की आय पर सवाल करने का अधिकार
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी को भी पति द्वारा दाखिल आय के शपथ-पत्र पर जिरह करने का पूरा अधिकार होगा। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों की वास्तविक आय और आर्थिक स्थिति सामने लाना है।
कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट की प्रक्रिया ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे किसी पक्ष के कानूनी बचाव के अधिकार प्रभावित हों। (High Court Maintenance Case) में अदालत ने निष्पक्ष सुनवाई और मामले को जल्द निपटाने के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।
रजिस्ट्रार जनरल को भी दिए निर्देश
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की प्रति संबंधित फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश को तत्काल भेजने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य भविष्य की सुनवाई में ऐसी स्थिति को लेकर आवश्यक सावधानी सुनिश्चित करना है।
कोर्ट के निर्देश के बाद 11 सितंबर की सुनवाई में पति को पत्नी के आय संबंधी शपथ-पत्र पर सवाल करने का अवसर मिलेगा। (High Court Maintenance Case) का यह आदेश भरण-पोषण मामलों में दोनों पक्षों की आय की निष्पक्ष जांच के महत्व को रेखांकित करता है।
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BNSS की धारा 144 में भरण-पोषण का प्रावधान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 144 भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान करती है। इसने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 का स्थान लिया है। इसके तहत पर्याप्त साधन होने के बावजूद पत्नी, बच्चों या माता-पिता का भरण-पोषण नहीं करने वाले व्यक्ति को अदालत गुजारा भत्ता देने का आदेश दे सकती है। परिस्थितियों के अनुसार अदालत अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमे से जुड़े खर्च के भुगतान का आदेश भी दे सकती है।
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