सीजी भास्कर, 21 मई : राष्ट्रीय जनगणना (Census Guidelines 2026 ) को हल्के में लेने की भूल अब भारी पड़ने वाली है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर किसी ने भी इस महा-अभियान में चालाकी करने की कोशिश की, तो प्रशासन उसके खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने जा रहा है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला प्रशासन ने गृह विभाग की अधिसूचना के बाद एक ऐसा कड़ा फरमान (डिजिटल जनगणना नियम) जारी किया है, जिसने लापरवाही बरतने वालों की नींद उड़ा दी है। नए आदेश के तहत अब हर नागरिक को प्रगणक (जनगणना कर्मी) के सामने बिल्कुल सच उगलना होगा, क्योंकि जानबूझकर दी गई एक भी गलत जानकारी आपको सीधे कानूनी शिकंजे में फंसा देगी।
प्रशासनिक गलियारों से आ रही खबरें बताती हैं कि इस बार का एक्शन प्लान बेहद सख्त है। नए और कड़े प्रोटोकॉल (डिजिटल जनगणना नियम) के मुताबिक, यदि किसी मकान मालिक ने जनगणना के लिए घर की दीवार पर लिखे गए सरकारी नंबर या चिन्ह को मिटाने या उसे नुकसान पहुंचाने की जुर्रत की, तो उस पर तत्काल 1000 का जुर्माना ठोक दिया जाएगा। इतना ही नहीं, असली सस्पेंस और डर की बात तो यह है कि यदि किसी ने सरकारी काम में अड़ंगा डाला या जनगणना दफ्तर में अनधिकृत रूप से घुसने का दुस्साहस किया, तो सिर्फ जुर्माना ही नहीं लगेगा, बल्कि सीधे 3 साल के लिए जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।
हालांकि, इस आक्रामकता के बीच स्थानीय सामाजिक मान्यताओं और महिलाओं के सम्मान का पूरा ख्याल रखा गया है। किसी भी महिला को उसके पति या दिवंगत पति का नाम लेने के लिए विवश नहीं किया जाएगा। लेकिन इसके अलावा, बाकी की हर एक जानकारी बिल्कुल सटीक और प्रामाणिक होनी चाहिए।
जनता के बीच फैले हर तरह के संशय और सस्पेंस को खत्म करते हुए जिला प्रशासन ने साफ किया है कि इस डेटाबेस (डिजिटल जनगणना नियम) के तहत जुटाई गई आपकी हर एक निजी जानकारी (Census Guidelines 2026 ) पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इसे किसी भी कोर्ट-कचहरी या आपराधिक मामले में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इस डेटा का इकलौता मकसद सिर्फ आपके हक की नीतियां बनाना और विकास योजनाओं को जमीन पर उतारना है। इसलिए, नखरे छोड़िए और प्रशासन के इस चक्रव्यूह से बचने के लिए चुपचाप सही जानकारी दर्ज कराइए।



