सीजी भास्कर, 10 अगस्त : छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, गोबर और घरेलू जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन (CG CBG Policy 2026) तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में हर साल करीब 150 लाख टन पैरा, 18 लाख टन से अधिक गोबर और 6 लाख टन से ज्यादा घरेलू जैविक कचरा निकलता है। इन संसाधनों के इस्तेमाल से प्रदेश में सालाना 10 लाख टन से अधिक कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) उत्पादन की क्षमता विकसित की जा सकती है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने CBG नीति-2026 के तहत शुरुआती चरण में हर साल 5 लाख टन सीबीजी उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए रायपुर, भिलाई, बिलासपुर, राजनांदगांव, धमतरी, अंबिकापुर, रायगढ़ और कोरबा में आठ सीबीजी प्लांट स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं को बीपीसीएल और गेल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से विकसित किया जाएगा।
इस पहल से जहां प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा, वहीं किसानों और गौशालाओं को भी अतिरिक्त आय का नया जरिया मिलेगा। खास तौर पर धान की कटाई के बाद खेतों में बचने वाले पैरा को सीबीजी प्लांटों के लिए कच्चे माल के रूप में खरीदा जाएगा।
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पैरा बेचकर किसान कमा सकेंगे अतिरिक्त आय
नई नीति के तहत धान (CG CBG Policy 2026) की कटाई के बाद निकलने वाले पैरा का उपयोग सीबीजी उत्पादन में किया जाएगा। वर्तमान में पैरा का कुछ हिस्सा पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल होता है, जबकि बड़ी मात्रा में यह खेतों में पड़ा रहता है या जला दिया जाता है। अब किसान पैरा को सीबीजी संयंत्रों को बेच सकेंगे। इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलेगी और खेतों में पराली जलाने की समस्या को भी कम करने में मदद मिल सकती है।
घरेलू कचरे और गोबर से बनेगी ग्रीन गैस
प्रदेश के नगरीय निकायों से रोज करीब 1650 टन ठोस कचरा निकलता है। अकेले रायपुर में प्रतिदिन 550 टन से ज्यादा कचरा एकत्र किया जाता है। इसमें मौजूद जैविक कचरे का इस्तेमाल सीबीजी उत्पादन के लिए किया जाएगा।
इससे एक तरफ शहरों में कचरा प्रबंधन का दबाव कम होगा, वहीं दूसरी ओर जैविक कचरे से स्वच्छ ईंधन तैयार किया जा सकेगा। गोबर और गौशालाओं से निकलने वाले जैविक अवशेषों को भी सीबीजी प्लांटों में कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
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निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
सीबीजी परियोजनाओं (CG CBG Policy 2026) में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार ने कई तरह की रियायतों का प्रावधान किया है। नीति के तहत भूमि डायवर्जन शुल्क, पंजीयन शुल्क और बिजली शुल्क में राहत दी जाएगी।
स्थानीय लोगों को रोजगार देने वाली इकाइयों को कर्मचारियों के वेतन और ईपीएफ अंशदान पर भी सरकारी सहायता मिलने का प्रावधान किया गया है। इससे सीबीजी प्लांटों के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
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SATAT और GOBARdhan से जुड़ी कंपनियों को लाभ
नीति के तहत केंद्र सरकार की SATAT योजना से स्वीकृति प्राप्त कंपनियां और GOBARdhan पोर्टल पर पंजीकृत डेवलपर लाभ ले सकेंगे। पहले से संचालित पात्र सीबीजी प्लांटों को भी नीति में दिए गए प्रोत्साहन का लाभ मिलेगा।
हर जिले को सीबीजी परियोजनाओं के लिए कैचमेंट एरिया बनाया जाएगा। साथ ही किसी एक इकाई को जिले की 80 प्रतिशत से अधिक क्षमता आवंटित नहीं की जाएगी। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में परियोजनाओं के विकास और संसाधनों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
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जैविक खाद का भी होगा इस्तेमाल
सीबीजी प्लांटों से निकलने वाली जैविक खाद की बिक्री और उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि, वन और उद्यानिकी विभाग इसके इस्तेमाल को प्रोत्साहित करेंगे। वहीं सहकारी समितियों के माध्यम से जैविक खाद की मार्केटिंग की जाएगी। इससे सीबीजी उत्पादन के साथ जैविक खाद के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा और किसानों को इसका लाभ मिल सकेगा।
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2030 तक लागू रहेगी CBG नीति
छत्तीसगढ़ की CBG नीति-2026 वर्ष 2030 तक लागू रहेगी। छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण को इस नीति की नोडल एजेंसी बनाया गया है। सरकार की इस पहल से कृषि अवशेष, गोबर और जैविक कचरे का बेहतर उपयोग होने की उम्मीद है। इससे स्वच्छ ईंधन उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों, गौशालाओं और स्थानीय लोगों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर भी तैयार हो सकते हैं।
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