सीजी भास्कर, रायपुर, 27 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में अधूरी और बिना पंजीयन वाली भू-संपदा परियोजना (CG-RERA Action) को लेकर छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CG-RERA) ने सख्त रुख अपनाया है। रायपुर जिले के सेजबहार स्थित ‘वात्सल्य गौरव-1, फेज-1’ परियोजना में विकास कार्य अधूरे रहने और पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं मिलने के मामले में प्रमोटर को आबंटी को 6 लाख 87 हजार 496 रुपये ब्याज देने का आदेश दिया गया है।
इसके अलावा परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने तक हर महीने 7,314 रुपये का भुगतान भी करना होगा। प्राधिकरण ने परियोजना का रेरा पंजीयन नहीं कराने के मामले में प्रमोटर के खिलाफ अधिनियम की धारा 59 के तहत अलग से प्रकरण दर्ज करने के निर्देश भी दिए हैं। इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भूखंड बेचने के बाद भी प्रमोटर अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकता।
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सात साल की अवधि का ब्याज
CG-RERA (CG-RERA Order) के आदेश के अनुसार, प्रमोटर को आबंटी द्वारा जमा की गई 8 लाख 12 हजार 643 रुपये की राशि पर वर्ष 2019 से अक्टूबर 2026 तक 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से कुल 6 लाख 87 हजार 496 रुपये का भुगतान करना होगा। इसके साथ ही 1 नवंबर 2026 से परियोजना का पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने तक आबंटी को प्रतिमाह 7,314 रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं। प्राधिकरण ने यह आदेश भू-संपदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के तहत पारित किया है।
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विकास कार्य अधूरे मिले
प्रकरण की सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने पाया कि परियोजना में स्वीकृत ले-आउट के अनुरूप विकास कार्य पूरे नहीं किए गए हैं। साथ ही सक्षम प्राधिकारी से पूर्णता प्रमाण पत्र भी प्राप्त नहीं किया गया है। इन तथ्यों के आधार पर परियोजना को अपूर्ण और चालू परियोजना की श्रेणी में माना गया। इसके बाद विलंब के लिए आबंटी को ब्याज भुगतान करने का आदेश जारी किया गया।
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बिना पंजीयन पर अलग कार्रवाई
प्राधिकरण ने परियोजना का रेरा पंजीयन नहीं कराए जाने को भी गंभीरता से लिया है। आदेश में कहा गया है कि भू-संपदा अधिनियम की धारा 3 के तहत जिन परियोजनाओं का पंजीयन अनिवार्य है, उनका पंजीयन कराना प्रमोटर की जिम्मेदारी है। इस मामले में पंजीयन नहीं कराए जाने पर प्रमोटर के खिलाफ धारा 59 के अंतर्गत पृथक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। इस धारा के तहत बिना आवश्यक पंजीयन परियोजना विकसित करने के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
भूखंड बेचकर जिम्मेदारी खत्म नहीं
CG-RERA (Real Estate Regulatory Authority Chhattisgarh) ने अपने आदेश के जरिए स्पष्ट किया है कि भूखंडों की बिक्री कर देने मात्र से प्रमोटर की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। स्वीकृत ले-आउट के अनुसार सड़क, नाली, विद्युत, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और जरूरी प्रमाण पत्र प्राप्त करना भी प्रमोटर के दायित्व में शामिल है। परियोजना के विकास कार्य अधूरे रहने या आवश्यक प्रमाण पत्र नहीं मिलने की स्थिति में आबंटियों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्राधिकरण नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है।
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आबंटियों के हितों पर जोर
CG-RERA की इस कार्रवाई को रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आदेश से यह संदेश भी मिलता है कि परियोजना के विकास में देरी और कानून के प्रावधानों के उल्लंघन के मामलों में प्रमोटरों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
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