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Home » Chhattisgarh Monsoon Pattern Change : बस्तर में बढ़ी बारिश, सरगुजा में घटा जलस्तर

Chhattisgarh Monsoon Pattern Change : बस्तर में बढ़ी बारिश, सरगुजा में घटा जलस्तर

By Newsdesk Admin
13/06/2026
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सीजी भास्कर, 13 जून। छत्तीसगढ़ में मानसून का स्वरूप पिछले कई दशकों में बदलता नजर आ रहा है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। जहां बस्तर संभाग के कई जिलों में बारिश बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, वहीं सरगुजा संभाग के कई हिस्सों में वर्षा में कमी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव खेती, जल प्रबंधन और भूजल संसाधनों पर व्यापक असर डाल सकता है। (Chhattisgarh Monsoon Pattern Change)

Contents
  • बस्तर में बढ़ रही बारिश, सरगुजा में घट रही वर्षा : Chhattisgarh Monsoon Pattern Change
  • जून-जुलाई कमजोर, अगस्त-सितंबर में बढ़ रही सक्रियता
  • खेती और जल प्रबंधन के लिए नई चुनौती : Chhattisgarh Monsoon Pattern Change

बस्तर में बढ़ रही बारिश, सरगुजा में घट रही वर्षा : Chhattisgarh Monsoon Pattern Change

लंबे समय के वर्षा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि दक्षिणी छत्तीसगढ़ के जिलों सुकमा, नारायणपुर और कोंडागांव में बारिश बढ़ने का रुझान दिखाई दे रहा है। इनमें सुकमा में वर्षा वृद्धि का ट्रेंड सबसे अधिक दर्ज किया गया है। इसके विपरीत, सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर और जशपुर जैसे जिलों में वर्षा में गिरावट देखी जा रही है। जशपुर में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव भविष्य में जल संसाधनों के वितरण और कृषि रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। एक ओर जहां कुछ क्षेत्रों में अधिक जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका बढ़ सकती है, वहीं दूसरी ओर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल संकट गहरा सकता है।

जून-जुलाई कमजोर, अगस्त-सितंबर में बढ़ रही सक्रियता

विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि मानसून का प्रभाव अब शुरुआती महीनों से खिसककर बाद के महीनों की ओर बढ़ रहा है। जून और जुलाई में वर्षा कम होने के संकेत मिल रहे हैं, जबकि अगस्त और सितंबर में अधिक बारिश का रुझान दिखाई देता है।

खेती के लिहाज से यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जून में ही धान की नर्सरी और बुआई की तैयारियां शुरू होती हैं। यदि शुरुआती दौर में पर्याप्त बारिश नहीं होती, तो किसानों को बुआई में देरी और उत्पादन प्रभावित होने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं फसल पकने के समय अधिक वर्षा होने से कटाई और भंडारण पर भी असर पड़ सकता है।

खेती और जल प्रबंधन के लिए नई चुनौती : Chhattisgarh Monsoon Pattern Change

राज्य की बड़ी आबादी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है। ऐसे में मानसून के बदलते स्वरूप का सीधा असर कृषि उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और भूजल रिचार्ज पर पड़ सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अब केवल कुल वर्षा की मात्रा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भी अहम है कि बारिश कब और किन क्षेत्रों में हो रही है।

वर्तमान में राज्य के प्रमुख जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण मौजूद है, जिससे सिंचाई और पेयजल की स्थिति बेहतर बनी हुई है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि भविष्य में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और वर्षा जल संचयन को प्राथमिकता देना आवश्यक होगा। साथ ही ऐसी कृषि तकनीकों और फसल किस्मों को बढ़ावा देना होगा जो अनिश्चित मानसून परिस्थितियों के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मानसून को देखते हुए किसानों, जल संसाधन विभाग और कृषि वैज्ञानिकों को दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी, ताकि वर्षा के बदलते पैटर्न से होने वाले संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

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