सीजी भास्कर, 14 सितम्बर। रायपुर के बीरगांव और दुर्ग जिले के भिलाई, भिलाई-चरौदा व रिसाली नगर निगम में दिसंबर में प्रस्तावित चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। चारों नगर निगमों में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब पार्टियों के सामने प्रत्याशियों के चयन की चुनौती है। खासकर महिला आरक्षित वार्डों में इस बार सक्रिय और खुद राजनीतिक भूमिका निभाने वाली महिलाओं को प्राथमिकता मिलने के संकेत हैं। (Chhattisgarh Municipal Elections)
महिला प्रतिनिधियों के कामकाज को लेकर बदले नियम : Chhattisgarh Municipal Elections
नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति या परिवार के अन्य सदस्यों के कामकाज संभालने की व्यवस्था पर शासन ने रोक लगाई है। अगस्त में जारी अधिसूचना के अनुसार महिला जनप्रतिनिधि के किसी करीबी रिश्तेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि या समन्वयक के तौर पर नामित नहीं किया जा सकेगा।
इस बदलाव के बाद राजनीतिक दलों को महिला आरक्षित वार्डों के लिए ऐसे उम्मीदवार तलाशने होंगे, जो खुद पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय हों। साथ ही कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच उनकी पहचान हो और चुनाव जीतने के बाद वे निकाय से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी स्वयं संभाल सकें।

महापौर पद के आरक्षण से बढ़ी चुनौती
बीरगांव नगर निगम में महापौर पद महिला के लिए आरक्षित है। ऐसे में यहां राजनीतिक दलों को पार्षद पद के साथ महापौर पद के लिए भी मजबूत महिला चेहरा तलाशना होगा। वहीं रिसाली में महापौर पद एससी महिला के लिए आरक्षित है। यहां एससी महिला दावेदारों की राजनीतिक सक्रियता और स्थानीय पकड़ टिकट चयन में अहम भूमिका निभा सकती है।
भाजपा और कांग्रेस ने चारों निगमों में चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रभारियों की नियुक्ति के साथ संभावित प्रत्याशियों से वन-टू-वन चर्चा और स्थानीय पदाधिकारियों से राय लेने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
230 वार्डों में 76 महिलाओं के लिए आरक्षित : Chhattisgarh Municipal Elections
चारों नगर निगमों में कुल 230 पार्षद पद हैं। इनमें 76 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। भिलाई के 70 वार्डों में 23 ओबीसी, 9 एससी, 3 एसटी और 35 सामान्य वार्ड हैं। रिसाली के 40 वार्डों में 8 ओबीसी, 7 एससी, 3 एसटी और 22 सामान्य वार्ड हैं।
भिलाई-चरौदा के 40 वार्डों में 11 ओबीसी, 6 एससी, 2 एसटी और 21 सामान्य वार्ड हैं। बीरगांव के 40 वार्डों में 13 ओबीसी, 5 एससी, 2 एसटी और 20 सामान्य वार्ड हैं। महिला आरक्षण के चलते इन निकायों में बड़ी संख्या में महिला उम्मीदवार मैदान में उतरेंगी। ऐसे में पार्टियों के लिए अब केवल आरक्षित वर्ग की महिला तलाशना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि राजनीतिक रूप से सक्रिय और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी खुद संभालने में सक्षम चेहरे का चयन भी महत्वपूर्ण होगा।


