सीजी भास्कर, 28 अगस्त। नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे हुई तबाही ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस आपदा के बीच चीन के तिब्बत क्षेत्र में बन रहे विशाल मेडोग जलविद्युत प्रोजेक्ट को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। (China Medog Dam Water Bomb)
नेपाल की ओर से आरोप लगाया गया है कि चीन के केरुंग क्षेत्र में झील फटने के बाद भारी मात्रा में पानी नेपाल की ओर आया, जिससे भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। नेपाल का कहना है कि अगर समय रहते इसकी जानकारी मिल जाती तो बड़े स्तर पर बचाव और सतर्कता की कार्रवाई की जा सकती थी।
नेपाल की बाढ़ ने बढ़ाई भारत की चिंता : China Medog Dam Water Bomb
रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। यह नदी तिब्बत के शिशापांगमा पर्वत क्षेत्र से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। बाढ़ से घरों, सड़कों और बिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है।
नेपाल में हुई इस तबाही के बाद भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में प्रशासन को अलर्ट किया गया है, क्योंकि नेपाल से आने वाला पानी गंडक नदी के जरिए भारतीय क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।
क्या है चीन का मेडोग प्रोजेक्ट?
चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर मेडोग जलविद्युत परियोजना का निर्माण कर रहा है। यह क्षेत्र भारत की अरुणाचल प्रदेश सीमा के काफी करीब है। यारलुंग त्सांगपो नदी भारत में प्रवेश करने के बाद सियांग और आगे चलकर ब्रह्मपुत्र नदी के रूप में बहती है।
इस परियोजना में नदी के बड़े हिस्से पर कई बांध बनाए जाने की योजना है। इसकी प्रस्तावित क्षमता करीब 60 गीगावाट बताई जा रही है। परियोजना को दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल किया जा रहा है और इसके पूरा होने के बाद चीन को बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन की उम्मीद है।

भूकंप और अचानक पानी छोड़ने को लेकर चिंता : China Medog Dam Water Bomb
मेडोग परियोजना का स्थान भूगर्भीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र में होने के कारण चिंता का विषय है। हिमालयी क्षेत्र में भूकंप और भूस्खलन का खतरा बना रहता है। विशेषज्ञों की चिंता केवल बांध की सुरक्षा को लेकर नहीं है, बल्कि भूकंप या भूस्खलन की स्थिति में नदी के प्रवाह में अचानक बदलाव को लेकर भी है।
अगर किसी कारण से बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर आता है तो इसका असर भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम तक पड़ सकता है। इसी वजह से नदी के ऊपरी हिस्से में चीन की गतिविधियों पर भारत लगातार नजर रखता है।
पेमा खांडू ने बताया था ‘वाटर बम’
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू चीन की मेडोग परियोजना को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने इसे ‘वाटर बम’ तक बताया था। उनका कहना है कि नदी के ऊपरी हिस्से में इतनी बड़ी परियोजना बनने से पानी के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ सकता है और किसी आपात स्थिति में अचानक पानी छोड़े जाने का खतरा पैदा हो सकता है।
भारत ने चीन के सामने भी सीमा पार नदियों और जल संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं रखी हैं। भारत के लिए यह मामला केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा प्रबंधन, जल सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाली आबादी की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
भारत भी सियांग परियोजना पर कर रहा काम : China Medog Dam Water Bomb
चीन की परियोजना के बीच भारत अरुणाचल प्रदेश में करीब 11,000 मेगावाट क्षमता वाली सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ-साथ पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने और संभावित बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद करना भी है।
हालांकि, इस परियोजना का स्थानीय स्तर पर विरोध भी हो रहा है। ऊपरी सियांग क्षेत्र के आदि समुदाय के लोग परियोजना को लेकर अपनी चिंताएं जता चुके हैं।
नेपाल की मौजूदा बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में नदियों, बांधों और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े जोखिमों पर बहस तेज कर दी है। भारत के लिए खास तौर पर उन परियोजनाओं पर नजर रखना महत्वपूर्ण है, जो सीमा पार नदियों के ऊपरी हिस्से में स्थित हैं।




