सीजी भास्कर, 2 सितंबर 2026 : छत्तीसगढ़ में नारियल की खेती (Coconut Business Chhattisgarh) ने अलग पहचान बनाई है। समुद्र से दूर होने के बावजूद राज्य में नारियल का उत्पादन और कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोंडागांव में स्थित प्रदर्शन सह बीज उत्पादन प्रक्षेत्र ने नारियल उत्पादन के मामले में देश में खास पहचान बनाई है। कोंडागांव का यह प्रक्षेत्र भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अधीन स्थापित है। करीब 100 एकड़ में फैले इस प्रक्षेत्र में 6 हजार नारियल के पेड़ हैं। यहां सालाना 3 लाख से ज्यादा नारियल का उत्पादन होता है। इसके साथ ही रायपुर में नारियल का रोजाना 45 से 48 लाख रुपए का कारोबार होता है।
18 प्रजातियों के नारियल तैयार
नारियल विकास बोर्ड के इस प्रक्षेत्र में नारियल की 18 अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। यहां होने वाले कुल उत्पादन में करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी बौनी, टॉल और संकर प्रजातियों के पेड़ों की है। नारियल की बिक्री से बोर्ड को सालाना करीब एक करोड़ रुपए की आमदनी होती है। इससे छत्तीसगढ़ में नारियल उत्पादन (Coconut Business Chhattisgarh) की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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हर साल 50 हजार से ज्यादा पौधों की बिक्री
यह प्रक्षेत्र सिर्फ नारियल उत्पादन तक सीमित नहीं है। यहां हर साल 50 हजार से अधिक नारियल के पौधे तैयार किए जाते हैं। इन पौधों की बिक्री छत्तीसगढ़ के साथ दूसरे राज्यों में भी होती है। नारियल के पौधों की लगातार मांग के चलते खेती और पौध उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए भी संभावनाएं बढ़ी हैं।
4-5 साल में फल, 60-70 साल तक उत्पादन
नारियल का पौधा सामान्य तौर पर चार से पांच साल में फल देना शुरू करता है। इसके बाद एक स्वस्थ पेड़ करीब 60 से 70 साल तक उत्पादन दे सकता है। यही वजह है कि लंबे समय के लिए बागवानी करने वाले किसानों के लिए नारियल की खेती (Coconut Business Chhattisgarh) उपयोगी विकल्प मानी जाती है। हालांकि बेहतर उत्पादन के लिए पौधे की प्रजाति, मिट्टी, सिंचाई, जल निकासी, खाद प्रबंधन और स्थानीय जलवायु का ध्यान रखना जरूरी है।
रायपुर में रोज 45-48 लाख का कारोबार
डूमरतराई थोक बाजार से जुड़े नारियल कारोबारियों के मुताबिक रायपुर में रोजाना 45 से 48 लाख रुपए का नारियल कारोबार होता है। बाजार में रोजाना 2 लाख से अधिक नारियल की आवक बताई गई है। छत्तीसगढ़ में नारियल की मांग पूरी करने के लिए तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश से भी नारियल मंगाया जाता है। कारोबारियों के मुताबिक महीने का कारोबार करीब 60 करोड़ रुपए तक पहुंचता है।
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छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा नारियल का कारोबार
कोंडागांव में बड़े पैमाने पर उत्पादन और रायपुर में मजबूत बाजार के कारण छत्तीसगढ़ में नारियल की खेती (Coconut Business Chhattisgarh) और कारोबार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। नारियल के लंबे उत्पादन चक्र और पौधों की मांग को देखते हुए यह क्षेत्र किसानों और कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। फैक्ट फाइल में दिए गए आंकड़े डूमरतराई थोक बाजार संघ से जुड़े नारियल कारोबारियों के मुताबिक हैं।
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