सीजी भास्कर, 22 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला (Corruption Allegations) सामने आ रहा है, जहां तिफरा स्थित छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड कार्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में है। पिछले दिनों ‘बादाम कांड’ के जरिए सुर्खियों में आईं महिला संपदा अधिकारी पूनम बंजारे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अभी बादाम वाले मामले की स्याही सूखी भी नहीं थी कि अब एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है, जिसमें एक पीड़ित महिला अधिकारी पर सीधे तौर पर रिश्वत लेने का आरोप लगा रही है।
एनओसी के बदले घूस की मांग
ताजा वायरल वीडियो में एक महिला अत्यंत हताश और परेशान नजर आ रही है। पीड़ित महिला का आरोप है कि उसने अपने मकान की एनओसी (NOC) के लिए सभी निर्धारित सरकारी शुल्क जमा कर दिए थे। नियमानुसार उसे डेढ़ महीने के भीतर दस्तावेज मिल जाने चाहिए थे, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी उसे कार्यालय के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। महिला ने वीडियो में साफ तौर पर कहा कि फाइल पर हस्ताक्षर करने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के नाम पर अधिकारी द्वारा पहले 10 हजार रुपये की मांग की गई थी।
महिला का दावा है कि जब उसने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो अधिकारी पांच-पांच हजार रुपये की किश्तों में घूस (Corruption Allegations) मांगने लगीं। महिला ने रुआंसे स्वर में बताया कि वह शारीरिक रूप से अस्वस्थ है, इसके बावजूद उसे बार-बार दफ्तर बुलाया जाता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पीड़ित के अनुसार, उसे फोन पर सूचना दी गई थी कि उसकी फाइल तैयार है और साहब के हस्ताक्षर हो चुके हैं, लेकिन जैसे ही वह ऑफिस पहुंची, अधिकारी अपनी बात से मुकर गईं और फिर से पैसों की मांग शुरू कर दी गई।
बादाम कांड से लेकर मुख्यालय अटैचमेंट तक का सफर
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब पांच दिन पहले तोरण साहू नामक एक युवक का वीडियो वायरल हुआ था। उस वीडियो में अधिकारी पूनम बंजारे फाइल नहीं मिलने का बहाना बना रही थीं, जिस पर युवक ने व्यंग्य करते हुए टेबल पर बादाम बिखेर दिए थे और कहा था कि “बादाम खाइए और मेरी फाइल ढूंढिए।” इस घटना के बाद विभाग की काफी किरकिरी हुई थी और शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोमवार को पूनम बंजारे को बिलासपुर से हटाकर रायपुर मुख्यालय अटैच कर दिया था।
लेकिन, विभाग की इस कार्रवाई को जनता नाकाफी मान रही है, क्योंकि अब जो नए वीडियो में (Corruption Allegations) सामने आए हैं, वे केवल कार्यशैली की लापरवाही नहीं बल्कि सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि अधिकारी खुद पर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर रही हैं, लेकिन पीड़ित महिला का आक्रोश और उसके द्वारा बताए गए तथ्य मामले को गंभीर बना रहे हैं।
दफ्तर में ‘असिस्टेंट’ के जरिए वसूली का खेल
स्थानीय लोगों और कार्यालय आने वाले अन्य फरियादियों ने दबे स्वर में कई बड़े खुलासे किए हैं। चर्चा है कि तिफरा हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में ज्वाइनिंग के बाद से ही उक्त महिला अधिकारी ने एक निजी महिला असिस्टेंट रखी हुई थी। आरोप है कि यह असिस्टेंट ही दफ्तर में आने वाले लोगों से डील करती थी और काम के बदले (Corruption Allegations) की सेटिंग जमाती थी।
कहा जा रहा है कि जो लोग पैसे देने को तैयार हो जाते, उनका काम एक-दो महीने में हो जाता था, लेकिन जो लोग ईमानदारी से काम कराना चाहते थे, उनकी फाइलों को जानबूझकर अटका दिया जाता था। लोग अपनी मेहनत की कमाई से घर खरीदने के बाद महीनों तक एनओसी और अन्य दस्तावेजों के लिए दफ्तर की चौखट घिसने को मजबूर थे। इस संगठित भ्रष्टाचार ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, जिसके कारण अब जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा, निलंबन की मांग तेज
इंटरनेट मीडिया (सोशल मीडिया) पर इस समय पूनम बंजारे के खिलाफ अभियान सा छिड़ गया है। लोग ट्विटर (X) और फेसबुक पर वीडियो साझा कर छत्तीसगढ़ सरकार और आवास मंत्री से कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। नेटिजन्स का कहना है कि महज अटैच कर देना सजा नहीं है, बल्कि इन गंभीर (Corruption Allegations) की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
प्रशासनिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा है कि कैसे एक सरकारी दफ्तर में बाहरी व्यक्ति के जरिए वसूली का तंत्र चलाया जा रहा था। जनता अब केवल स्थानांतरण से संतुष्ट नहीं है; उनकी मांग है कि महिला अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और जिन पीड़ितों से अवैध वसूली की गई है, उन्हें उनका पैसा वापस दिलाया जाए। सोशल मीडिया पर लोग इसे सीधे तौर पर व्यवस्था की विफलता बता रहे हैं और (Corruption Allegations) की निष्पक्ष जांच के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
जांच की आवश्यकता और विभागीय चुप्पी
फिलहाल, वायरल हो रहे इस दूसरे वीडियो की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक स्तर पर नहीं की गई है, लेकिन जन दबाव को देखते हुए कलेक्टर और हाउसिंग बोर्ड के उच्चाधिकारी इस मामले में जल्द ही जांच कमेटी गठित कर सकते हैं। यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत शिकायत नहीं रह गया है, बल्कि यह सार्वजनिक सेवा में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण बन गया है।
वीडियो में पीड़ित महिला की बेबसी और अधिकारी की बेरुखी शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल खड़े करती है। यदि इन (Corruption Allegations) में सच्चाई पाई जाती है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकारी कुर्सियों पर बैठे कुछ लोग किस तरह आम जनता का शोषण कर रहे हैं। अब देखना होगा कि बादाम कांड से शुरू हुआ यह विवाद निलंबन और जेल तक पहुंचता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।


