सीजी भास्कर, 22 जून। भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच सामने आए आंकड़ों ने कई सवाल खड़े (Corruption Cases) कर दिए हैं। सरकारी दफ्तरों में काम कराने के दौरान रिश्वतखोरी और अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन अब जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड यह बता रहे हैं कि किन विभागों में सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं। आंकड़ों ने प्रशासनिक व्यवस्था के कई पहलुओं पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
प्रदेश के अलग अलग जिलों में हुई कार्रवाई से यह भी साफ हुआ है कि जांच एजेंसियां अब केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं। पटवारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक पर कार्रवाई हुई है। यही कारण है कि भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर निगरानी और जवाबदेही की मांग भी लगातार बढ़ रही है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा पिछले पांच वर्षों में 400 से अधिक मामलों में कार्रवाई की गई है। वर्ष 2021 से 2026 के बीच रिश्वतखोरी, आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
राजस्व विभाग सबसे ज्यादा निशाने पर Corruption Cases
जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग से जुड़ी रही हैं। नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और जमीन संबंधी मामलों में रिश्वत मांगने के आरोपों में कई पटवारी, राजस्व निरीक्षक और अन्य कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में आए।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राजस्व विभाग से जुड़े 56 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 67 आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनमें 34 पटवारी और 12 लिपिक शामिल हैं।
पंचायत विभाग में भी सामने आए मामले
ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई से अछूता नहीं रहा। जनपद पंचायतों और पंचायत स्तर पर विभिन्न योजनाओं में अनियमितताओं तथा कमीशनखोरी की शिकायतों के बाद कई अधिकारी जांच के दायरे में आए।
इस विभाग से जुड़े 14 प्रकरणों में 15 आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई दर्ज की गई। इनमें कई प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल रहे।
नगरीय निकायों में भी हुई कार्रवाई
नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों से जुड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई (Corruption Cases) हुई है। इंजीनियर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ रिश्वत तथा वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच की गई।
हाल के वर्षों में नगरीय प्रशासन विभाग से जुड़े कुछ चर्चित मामलों ने भी सुर्खियां बटोरी हैं, जिनमें वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए।
शिक्षा और गृह विभाग भी दायरे में
स्कूल शिक्षा विभाग में 20 प्रकरणों में 25 आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इनमें प्राचार्य और लिपिक स्तर के कर्मचारी शामिल रहे। वहीं गृह विभाग से जुड़े 10 मामलों में 13 आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई दर्ज की गई। इनमें एएसआई और हेड कांस्टेबल स्तर के कर्मचारी भी शामिल रहे।
इन जिलों में ज्यादा मामले
भ्रष्टाचार संबंधी मामलों में सूरजपुर, सरगुजा, रायपुर, रायगढ़ और मुंगेली जिले प्रमुख रूप से सामने आए हैं।
* सूरजपुर – 16 प्रकरण
* सरगुजा – 12 प्रकरण
* रायपुर – 13 प्रकरण
* रायगढ़ – 11 प्रकरण
* मुंगेली – 8 प्रकरण
बड़े अधिकारियों तक पहुंची जांच
जांच एजेंसियों का कहना है कि कई मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने (Corruption Cases) आई है। छापेमारी के दौरान चल अचल संपत्तियों, बैंक खातों और निवेश से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। इसके बावजूद भ्रष्टाचार पर पूरी तरह अंकुश लगाना अब भी चुनौती बना हुआ है।





