सीजी भास्कर, 16 अगस्त : भिलाई स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस से 250 टन लोहा चोरी (BSP Scrap Theft Case) और फ्लू डस्ट के कथित अवैध परिवहन से जुड़े मामले में पूर्व GM हिमांशु भूषण मलिक को हाईकोर्ट से राहत मिली है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने 10 अगस्त को उनकी पहली जमानत याचिका मंजूर कर दी। पुरानी भिलाई पुलिस ने उन्हें 9 जुलाई को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वे जेल में थे। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें शर्तों के साथ रिहाई मिलेगी।
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फ्लू डस्ट के परिवहन से शुरू हुई जांच
मामला भिलाई स्टील प्लांट के ब्लास्ट फर्नेस विभाग से फ्लू डस्ट के कथित अवैध परिवहन और स्क्रैप चोरी (BSP Scrap Theft Case) से जुड़ा है। शुरुआती जांच में दो ट्रकों के जरिए फ्लू डस्ट ले जाने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस को इन ट्रकों में मौजूद कुछ फेरस स्क्रैप के प्लांट की संपत्ति होने का संदेह हुआ। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और स्क्रैप चोरी तथा कथित हेराफेरी में शामिल लोगों की भूमिका की जांच शुरू की गई।
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स्क्रैप यार्ड की निगरानी में लापरवाही का आरोप
पुलिस जांच में कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह समेत 17 लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई। इसी जांच के दौरान पूर्व GM हिमांशु भूषण मलिक को भी आरोपी बनाया गया। उन पर स्क्रैप यार्ड की निगरानी और स्टॉक रिकॉर्ड के रखरखाव से जुड़ी जिम्मेदारियों में लापरवाही का आरोप था।
जांच एजेंसी के अनुसार, निगरानी और रिकॉर्ड में कथित लापरवाही के कारण स्क्रैप की चोरी और हेराफेरी का रास्ता आसान हुआ। इसी आधार पर मलिक की भूमिका की जांच की गई और उन्हें मामले में आरोपी बनाया गया।
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बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया आधारहीन
हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने इन आरोपों का विरोध किया। उनके वकील ने दलील दी कि मलिक का नाम FIR में दर्ज नहीं है। उनके खिलाफ मुख्य आधार सह-आरोपी के मेमो बयान हैं, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि करने वाला ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि प्लांट की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF की थी और मलिक की भूमिका स्क्रैप यार्ड की निगरानी तक सीमित थी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि मलिक जांच में सहयोग कर रहे थे और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने पेश भी हुए।
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चार्जशीट पेश होने के बाद मिली जमानत
राज्य की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। हालांकि कोर्ट ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद मलिक को जमानत दे दी। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले में चार्जशीट पहले ही पेश की जा चुकी है।
हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया कि मलिक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वे 9 जुलाई से हिरासत में हैं। इसी मामले के एक सह-आरोपी को 4 अगस्त को अग्रिम जमानत मिलने का भी उल्लेख कोर्ट के आदेश में किया गया।
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जमानत के साथ लगाई गईं कई शर्तें
हाईकोर्ट ने मलिक को दो स्थानीय जमानतदार और व्यक्तिगत बंधपत्र पेश करने के बाद रिहा करने का आदेश दिया है। उन्हें ट्रायल की तय तारीखों पर अदालत में उपस्थित रहना होगा।
कोर्ट ने गवाहों की गवाही के दौरान अनावश्यक स्थगन की मांग नहीं करने की शर्त भी लगाई है। इसके अलावा आरोप तय होने और बयान दर्ज होने जैसी महत्वपूर्ण तारीखों पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहना होगा।
इस तरह 250 टन स्क्रैप चोरी (BSP Scrap Theft Case) से जुड़े मामले में पूर्व GM हिमांशु भूषण मलिक को फिलहाल हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।




