सीजी भास्कर, 27 अप्रैल : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला प्रोजेक्ट (ED Raid in Dhamtari Bharat Mala Case) में कथित घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने सोमवार तड़के प्रदेश के कई ठिकानों पर एक साथ धावा बोल दिया। जांच की आंच अब धमतरी जिले के कुरुद तक पहुंच गई है, जहां पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के निवास पर केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम दस्तावेजों को खंगाल रही है। सुबह-सुबह हुई इस अचानक कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों की एक बड़ी फौज घर के भीतर मौजूद है और किसी को भी अंदर या बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है ।
12 अधिकारी और तीन गाड़ियां
जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब तीन गाड़ियों में सवार होकर 12 से अधिक ईडी (ED Raid in Dhamtari Bharat Mala Case) के अधिकारी अचानक भूपेंद्र चंद्राकर के घर पहुंचे। टीम ने घर के चारों ओर मोर्चा संभाल लिया और तुरंत जांच-पड़ताल शुरू कर दी। केवल धमतरी ही नहीं, बल्कि जमीन कारोबारी गोपाल गांधी और उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर भी एक साथ दबिश दी गई है। आरोप है कि भारतमाला परियोजना के मुआवजा वितरण में भारी अनियमितता की गई है। इस कार्रवाई की भनक स्थानीय पुलिस तक को नहीं थी, जिससे यह स्पष्ट है कि ईडी इस मामले में बेहद गुप्त तरीके से काम कर रही है ।
करोड़ों का खेल, मुआवजे की बंदरबांट
यह पूरा मामला रायपुर-विशाखापत्तनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए किए गए जमीन अधिग्रहण (ED Raid in Dhamtari Bharat Mala Case) से जुड़ा हुआ है। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कृषि भूमि को ‘बैकडेट’ में गैर-कृषि (डायवर्टेड) घोषित कर दिया गया, ताकि मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ाया जा सके। इसके अलावा, एक ही खसरे की जमीन को कागजों में छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग करीबियों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया। आशंका जताई जा रही है कि यह घोटाला 500 करोड़ रुपए से भी अधिक का हो सकता है। जहां शिकायतों के आधार पर ईडी ने अब तक कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं, वहां जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है ।
अभनपुर से लेकर पाटन तक फैला जाल
ईडी की रडार पर अभनपुर, कायाबांधा, दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव के देवादा और मगरलोड जैसे क्षेत्र हैं, जहां मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की शिकायतें मिली थीं। इससे पहले भी गोपाल गांधी के ठिकानों से मिली डायरियों और डिजिटल साक्ष्यों ने इस घोटाले की परतों को खोलना शुरू कर दिया था। हालांकि, अब तक प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने मीडिया से दूरी बनाए रखी है और रेड की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जैसे ही अधिकारी जांच पूरी कर वहां से बाहर निकलेंगे, तभी इस कार्रवाई में हुई बरामदगी का सही खुलासा हो पाएगा। इस (ED Raid in Dhamtari Bharat Mala Case) ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है और विपक्ष इसे मुद्दा बनाने की तैयारी में है।


